ITR Refund : इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने के बाद महीनों से रिफंड की राह देख रहे करदाताओं के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने अहम अपडेट दिया है।
विभाग से जुड़े अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अगले महीने तक लगभग सभी पेंडिंग रिफंड टैक्सपेयर्स के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। हालांकि, यह राहत केवल उन लोगों को मिलेगी जिनके दस्तावेजों और बैंक विवरण में कोई कमी नहीं है।
बैंक खाते का वैलिड होना अनिवार्य
रिफंड अटकने का सबसे बड़ा कारण बैंक खाते की गलत जानकारी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि रिफंड प्रोसेस होने के लिए ई-फाइलिंग पोर्टल पर बैंक अकाउंट का सही और ‘वैलिडेट’ होना जरूरी है।
अगर आपके अकाउंट नंबर, आईएफएससी (IFSC) कोड या नाम की स्पेलिंग में कोई मिसमैच है, तो रिफंड जारी नहीं किया जाएगा। करदाताओं को सलाह दी गई है कि वे तुरंत पोर्टल पर लॉग-इन करें और सुनिश्चित करें कि उनका प्राइमरी बैंक अकाउंट रिफंड के लिए चुना गया है और वह एक्टिव है।
राजनीतिक चंदे के दावों पर अटकी फाइलें
विभाग ने रिफंड में देरी का एक बड़ा कारण रिटर्न की स्क्रूटनी (जांच) को बताया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन टैक्सपेयर्स ने राजनीतिक दलों को चंदा देने का दावा करते हुए टैक्स छूट मांगी थी, उनकी फाइलें जांच के दायरे में हैं।
जांच में सामने आया है कि कई मामलों में यह चंदा राजनीतिक दलों के खातों में पहुंचा ही नहीं था। ऐसे संदिग्ध मामलों में विभाग ने रिफंड रोक रखा है और पूरी जांच के बाद ही इस पर फैसला लिया जाएगा।
पुराना बकाया और CPC की देरी
अगर आपका स्टेटस अभी भी ‘प्रोसेसिंग’ दिखा रहा है, तो इसकी वजह CPC बेंगलुरु में चल रही प्रक्रिया हो सकती है। इसके अलावा, अगर आप पर कोई पुराना टैक्स बकाया है, तो विभाग सेक्शन 245 के तहत आपके रिफंड को उस बकाया राशि से एडजस्ट कर सकता है।
ऐसी स्थिति में आपको अपने असेसमेंट ऑफिसर (AO) से संपर्क करना चाहिए। यदि रिफंड जारी होने का मैसेज आ चुका है लेकिन पैसा नहीं मिला, तो आप ई-फाइलिंग पोर्टल पर ‘e-Grievance’ विकल्प के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।



















