Silver Price Update : बीते कुछ समय से सराफा बाजार में चांदी की कीमतों ने निवेशकों को चौंका दिया है. पिछले एक साल में चांदी ने अपने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए जबरदस्त रिटर्न दिया है.
हालांकि, शादी-ब्याह के सीजन में खरीदारी करने वाले परिवारों के लिए यह महंगाई चिंता का विषय है, लेकिन एक राहत की बात भी सामने आई है. आंकड़ों के मुताबिक, इस भारी तेजी के बावजूद भारत में चांदी की कीमत पड़ोसी देश चीन के मुकाबले काफी कम है.
भारत और चीन के भाव में बड़ा अंतर
अगर हम आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में चांदी अभी भी ग्लोबल रेट के मुकाबले डिस्काउंट पर उपलब्ध है. भारत में चांदी का भाव करीब 335 रुपये प्रति ग्राम चल रहा है. एक औंस (लगभग 28.3 ग्राम) के हिसाब से गणना करें, तो भारत में इसकी कीमत करीब 9,984 रुपये बैठती है.
वहीं, चीन में स्थिति बिल्कुल अलग है. वहां चांदी अंतरराष्ट्रीय दरों से भी महंगे दाम पर बिक रही है. चीन में एक औंस चांदी की कीमत लगभग 125 डॉलर (करीब 11,450 रुपये) तक पहुंच गई है. इस प्रकार, भारतीय खरीदारों को चीन के मुकाबले प्रति औंस करीब 2,000 रुपये कम चुकाने पड़ रहे हैं. सीधे शब्दों में कहें तो भारत में चांदी चीन से लगभग 17 फीसदी सस्ती है.
ग्लोबल मार्केट में ऐतिहासिक उछाल
चांदी की यह तेजी केवल स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 109 डॉलर प्रति औंस के पार कारोबार कर रही है. साल 2026 की शुरुआत से अब तक कीमतों में करीब 44 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है. वहीं, अगर पिछले 12 महीनों का रिकॉर्ड देखें तो चांदी ने 250 फीसदी से ज्यादा की छलांग लगाई है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है.
चीन की नई पॉलिसी का असर
इस मूल्य वृद्धि और सप्लाई में कमी के पीछे चीन की नई नीतियां अहम भूमिका निभा रही हैं. चीन दुनिया में चांदी की सप्लाई का मुख्य केंद्र है और ग्लोबल सप्लाई का 65 फीसदी से ज्यादा हिस्सा यहीं से आता है. चीन ने 1 जनवरी 2026 से चांदी के निर्यात (Export) पर नियम बेहद सख्त कर दिए हैं.
नए नियमों के मुताबिक, अब कंपनियों को चांदी निर्यात करने के लिए सरकारी लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा. यह व्यवस्था वर्ष 2027 तक लागू रहेगी. इस कड़े नियम के कारण छोटे निर्यातक बाजार से बाहर हो सकते हैं और केवल बड़ी सरकारी मंजूरी प्राप्त कंपनियां ही निर्यात कर पाएंगी. इससे वैश्विक बाजार में चांदी की आवक प्रभावित हुई है.
लूनर न्यू ईयर और बढ़ती मांग
सप्लाई चेन पर दबाव का एक और कारण चीन में आगामी लूनर न्यू ईयर (Lunar New Year) है. 17 फरवरी 2026 से शुरू होने वाली इन छुट्टियों से पहले चीन में चांदी की जमाखोरी और मांग बढ़ जाती है. वहां पहले से ही स्टॉक कम है और प्रीमियम ऊंचा बना हुआ है. छुट्टियों के कारण बाजार करीब एक हफ्ते बंद रहेगा, जिससे कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.



















