Tatkal Ticket Rules 2026 : भारतीय रेलवे ने वर्ष 2026 की शुरुआत के साथ ही तत्काल टिकट आरक्षण प्रणाली में व्यापक बदलाव कर दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब ‘डिजिटल पहचान’ यानी OTP सत्यापन (Verification) को पूरी प्रक्रिया का आधार बना दिया गया है।
रेलवे का यह कदम उन लाखों यात्रियों के लिए राहत लेकर आया है, जो अक्सर दलालों और बिचौलियों के कारण कन्फर्म टिकट से वंचित रह जाते थे।
OTP का सुरक्षा कवच और दलालों पर लगाम
नये नियमों में सबसे बड़ा बदलाव सत्यापन प्रक्रिया में किया गया है। अब चाहे यात्री IRCTC की वेबसाइट का इस्तेमाल करें, मोबाइल ऐप का या फिर रेलवे रिजर्वेशन काउंटर (PRS) पर जाएं, हर स्थिति में पंजीकृत मोबाइल नंबर पर आया OTP दर्ज करना अनिवार्य होगा।
रेलवे ने तत्काल बुकिंग शुरू होने के पहले 30 मिनट तक एजेंटों और दलालों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। पहले दलाल ऑटोमेशन सॉफ्टवेयर के जरिए चंद सेकेंडों में सारी सीटें ब्लॉक कर लेते थे। अब प्रत्येक बुकिंग पर OTP की अनिवार्यता और ‘वन पर्सन-वन अकाउंट’ की सख्ती ने अवैध बुकिंग के रास्ते बंद कर दिए हैं।
आधार लिंकिंग और दस्तावेजों की नई शर्तें
2026 की नियमावली के अनुसार, तत्काल टिकट बुक करने के लिए IRCTC यूजर आईडी का आधार कार्ड से लिंक होना अनिवार्य है। एक ट्रांजेक्शन में अधिकतम चार यात्रियों के लिए ही टिकट बुक किया जा सकता है।
सुरक्षा को इतना कड़ा किया गया है कि समूह में यात्रा कर रहे प्रत्येक यात्री के लिए अलग OTP की आवश्यकता बताई गई है। यह प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि एक ही व्यक्ति कई अलग-अलग खातों का उपयोग करके सिस्टम को धोखा न दे सके।
रेलवे काउंटर पर मोबाइल ले जाना अब जरूरी
अक्सर लोग रेलवे स्टेशन के काउंटर से टिकट लेना सुरक्षित मानते थे, लेकिन अब वहां भी नियम बदल गए हैं। यदि आप काउंटर से तत्काल टिकट ले रहे हैं, तो फॉर्म में अपना मोबाइल नंबर भरना होगा। क्लर्क द्वारा एंट्री करने पर आपके फोन पर एक कोड आएगा, जिसे बताने के बाद ही टिकट प्रिंट होगा। यदि नेटवर्क समस्या के कारण OTP नहीं आता, तो आपको दोबारा अनुरोध करना होगा। भुगतान के लिए नकद, यूपीआई और कार्ड के विकल्प खुले रहेंगे।
आम यात्री के लिए आसान हुई राह
वातानुकूलित (AC) श्रेणी के लिए सुबह 10 बजे और नॉन-एसी के लिए 11 बजे बुकिंग शुरू होती है। पहले वेबसाइट स्लो होने या सीटें खत्म होने की शिकायत आम थी। अब दलालों के हटने से सर्वर पर लोड कम हुआ है। रेलवे का मानना है कि इस पारदर्शी व्यवस्था से त्योहारों और छुट्टियों के पीक सीजन में भी वास्तविक यात्रियों को टिकट मिलने के अवसर बढ़ेंगे। यह पूरी प्रक्रिया कालाबाजारी रोकने और डेटा को सुरक्षित रखने के लिए डिजाइन की गई है।



















