Union Budget 2026 : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश का आम बजट पेश करते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर और रेलवे पर बड़ा दांव खेला है। अपने करीब डेढ़ घंटे के भाषण में उन्होंने 9वीं बार बजट पेश करते हुए स्वास्थ्य और शिक्षा के साथ-साथ रेल नेटवर्क को मजबूत करने का रोडमैप रखा।
हालांकि, बजट के आंकड़ों ने आम यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसमें रेल टिकट के दाम बढ़ने के संकेत छिपे हैं।
क्या महंगा होने वाला है रेल का सफर?
बजट दस्तावेजों में रेलवे की कमाई को लेकर जो आंकड़े सामने आए हैं, उनसे किराए में बढ़ोतरी की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। सरकार ने बताया है कि रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में यात्रियों से मिलने वाले राजस्व (Passenger Receipts) से 80 हजार करोड़ रुपये कमाने का लक्ष्य रखा है। वहीं, मौजूदा वित्त वर्ष में यह अनुमान 87 हजार करोड़ रुपये है।
इन आंकड़ों को देखते हुए बाजार में यह अंदेशा जताया जा रहा है कि रेलवे आने वाले दिनों में टिकट की कीमतों में बदलाव कर सकता है। हालांकि, यह अभी सिर्फ एक अनुमान है। जनरल बोगी या स्लीपर क्लास के टिकटों में कोई बढ़ोतरी होगी या नहीं, इस पर अंतिम फैसला रेलवे बोर्ड ही करेगा।
7 हाई-स्पीड कॉरिडोर से जुड़ेंगे बड़े शहर
किराये की चर्चा के बीच सरकार ने कनेक्टिविटी को लेकर बड़ी खुशखबरी दी है। वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि देश में 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाए जाएंगे। इन कॉरिडोर का मकसद भारत के अलग-अलग आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्रों के बीच की दूरी को कम करना है। यह प्रोजेक्ट बड़े औद्योगिक इलाकों को धार्मिक और व्यापारिक शहरों से सीधा जोड़ेगा।
मुंबई-दिल्ली समेत ये शहर होंगे कनेक्ट
जिन 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा गया है, वे देश के महानगरों और प्रमुख शहरों को कवर करेंगे। इस लिस्ट में मुंबई, पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, वाराणसी और सिलीगुड़ी शामिल हैं।
सरकार का मानना है कि इन रूटों पर हाई-स्पीड कनेक्टिविटी से वित्तीय केंद्रों और आईटी हब के बीच संपर्क बेहतर होगा। बता दें कि अब रेल बजट अलग से नहीं आता, बल्कि इसे आम बजट के हिस्से के रूप में ही पेश किया जाता है। इस बार रेलवे और इंफ्रा को कुल कैपेक्स का करीब 47 फीसदी हिस्सा दिया गया है।



















