Dandruff Home Remedies : कंधों पर गिरती सफेद पपड़ी और सिर में लगातार होने वाली खुजली न सिर्फ असहज महसूस कराती है, बल्कि नजरअंदाज करने पर हेयर फॉल (Hair Fall) की बड़ी वजह भी बन जाती है।
बाजार के एंटी-डैंड्रफ शैंपू इस्तेमाल करते वक्त तो असर दिखाते हैं, लेकिन बोतल खत्म होते ही समस्या जस की तस हो जाती है। असल में रूसी की मुख्य जड़ मैलासेजिया (Malassezia) नाम का फंगस और स्कैल्प के प्राकृतिक पीएच का असंतुलन है।
जब तक त्वचा के वातावरण को ठीक नहीं किया जाएगा, पपड़ी बार-बार बनती रहेगी। कुछ आसान और आजमाए हुए घरेलू नुस्खों से इस चक्र को तोड़ा जा सकता है।
सेब का सिरका करेगा पीएच बैलेंस
स्कैल्प का स्वाभाविक वातावरण हल्का अम्लीय होता है। केमिकल वाले शैंपू इस संतुलन को बिगाड़ देते हैं, जिससे फंगस तेजी से पनपता है। सेब का सिरका অর্থাৎ एप्पल साइडर विनेगर (Apple Cider Vinegar) इस समस्या को नियंत्रित करने में बेहद मददगार साबित होता है।
एक कप सादे पानी में दो चम्मच विनेगर मिलाकर पतला घोल तैयार करें। शैंपू करने के बाद इस पानी से सिर को धोएं और हल्के हाथों से मसाज करें।
दो से तीन मिनट बाद सादे पानी से रिंस कर लें। हफ्ते में दो बार यह प्रयोग करने से सिर की तेलीयता और मृत त्वचा साफ होने लगती है।
दही और शहद का कंडीशनिंग मास्क
रूखी त्वचा वाले लोगों में डैंड्रफ के साथ खिंचाव और जलन की शिकायत ज्यादा देखी जाती है। इसके लिए दही एक बेहतरीन विकल्प है, क्योंकि इसमें प्राकृतिक रूप से लैक्टिक एसिड और अच्छे बैक्टीरिया (Probiotics) पाए जाते हैं।
पांच बड़े चम्मच ताजे दही में एक चम्मच शुद्ध शहद अच्छी तरह मिलाएं। इस लेप को बालों की जड़ों से लेकर सिरों तक लगाएं।
करीब 45 मिनट से एक घंटे तक रखने के बाद किसी सौम्य यानी माइल्ड शैंपू से धो लें। यह स्कैल्प को गहराई से नमी देता है, जिससे फ्लेक्स झड़ना बंद हो जाते हैं।
टी ट्री ऑयल और नींबू का सही तरीका
टी ट्री ऑयल में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसे कभी भी सीधे स्कैल्प पर न लगाएं, क्योंकि शुद्ध तेल काफी तेज होता है। शैंपू करते समय हथेली में शैंपू की मात्रा लेकर उसमें 3 से 4 बूंदें टी ट्री ऑयल मिलाएं और बाल धोएं।
अगर तेल मालिश करना पसंद करते हैं, तो हल्के गुनगुने नारियल तेल में आधा चम्मच ताजा नींबू का रस मिलाएं। नींबू का सिट्रिक एसिड जिद्दी पपड़ी को ढीला करता है और नारियल तेल त्वचा को पोषण देता है। इसे स्कैल्प पर लगाकर हल्के हाथों से मालिश करें और एक घंटे बाद गुनगुने पानी से धो लें।
ध्यान रहे, अगर स्कैल्प पर बहुत ज्यादा लालिमा, तेज जलन या पीले रंग की मोटी परत जम रही हो, तो यह सेबोरिक डर्मेटाइटिस का संकेत हो सकता है; ऐसी स्थिति में घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डर्मेटोलॉजिस्ट से जांच कराना ही सुरक्षित कदम है।











