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पहली बार कर रहे हैं शिव पूजा? जानें सोलह उपचार पूजन और पार्थिव शिवलिंग बनाने का नियम

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Ganga Updated Sat, 08 Aug 2026 09:00 AM IST

शिवमहापुराण के अनुसार भगवान शिव की सोलह उपचार (षोडशोपचार) विधि से पूजा करने पर सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। घर पर शुद्ध मिट्टी या अन्य प्राकृतिक चीजों से पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजन करने का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है।

Shivling Puja Vidhi

Shivling Puja Vidhi : सावन और सोमवार के दिनों में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है। महादेव बहुत भोले हैं और सच्चे मन से की गई छोटी सी पूजा से भी प्रसन्न हो जाते हैं।

शिवमहापुराण में शिवजी को प्रसन्न करने के लिए ‘सोलह उपचार पूजन’ यानी षोडशोपचार विधि का वर्णन मिलता है। इसके साथ ही घर पर पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा करने को बेहद फलदायी बताया गया है।

क्या होता है सोलह उपचार पूजन?

सोलह उपचार पूजन का सीधा सा मतलब है भगवान शिव की 16 चरणों में विधिवत पूजा करना और उन्हें 16 पवित्र सामग्रियां अर्पित करना।

शिवमहापुराण के अनुसार, इस पूजन क्रम में ये 16 चरण शामिल हैं:

  • आवाहन: भगवान शिव का ध्यान कर उन्हें पूजा स्थल पर आमंत्रित करना।
  • आसन: महादेव को विराजने के लिए स्थान देना।
  • अर्घ्य: हाथों में जल लेकर प्रभु को समर्पित करना।
  • पाद्य: भगवान के चरण धोना।
  • आचमन: शुद्ध जल से आचमन कराना।
  • स्नान (अभ्यंग): जल, दूध या इत्र से स्नान कराना।
  • वस्त्र: प्रभु को स्वच्छ वस्त्र या कलावा अर्पित करना।
  • गंध: चंदन या भस्म लगाना।
  • पुष्प: आक, धतूरा या बेलपत्र जैसे प्रिय फूल-पत्ते चढ़ाना।
  • धूप: सुगंधित धूप दिखाना।
  • दीप: देसी घी का दीपक जलाकर आरती की तैयारी करना।
  • नैवेद्य: फल, मिष्ठान या भोग अर्पित करना।
  • तांबूल: पान का पत्ता और सुपारी चढ़ाना।
  • नीराजन: मुख्य आरती उतारना।
  • नमस्कार: श्रद्धापूर्वक प्रणाम कर आशीर्वाद मांगना।
  • विसर्जन: पूजा संपन्न होने के बाद प्रभु को भावपूर्ण विदाई देना।

कहां कर सकते हैं यह पूजा?

कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि यह पूजा घर पर करनी चाहिए या मंदिर में। शिवमहापुराण में स्पष्ट लिखा है कि आप स्वयं द्वारा स्थापित, ऋषियों या देवताओं द्वारा स्थापित, स्वयंभू शिवलिंग या अपने हाथों से बनाए गए पार्थिव शिवलिंग पर यह पूजा कर सकते हैं।

यदि आप किसी मंदिर में जाकर दर्शन भी कर लेते हैं या पूजन सामग्री समर्पित कर देते हैं, तो भी आपको पूर्ण फल मिलता है।

घर पर पार्थिव शिवलिंग कैसे बनाएं?

सावन में पार्थिव शिवलिंग की पूजा का बहुत बड़ा फल बताया गया है। पार्थिव शिवलिंग यानी अपने हाथों से बनाया गया शिवलिंग।

आप अपनी सुविधा और रुचि के अनुसार इन चीजों से शिवलिंग बना सकते हैं:

शुद्ध मिट्टी: खेत या नदी के किनारे की स्वच्छ मिट्टी।

अन्य सामग्रियां: गाय का गोबर, आटा, गुड़, माखन, भस्म, अन्न या कनेर के फूल।

शिवलिंग का आकार बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए। इसे बनाते समय मन में ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते रहें।

भगवान शिव केवल भाव के भूखे हैं। यदि आप बिना किसी दिखावे के, केवल सच्चे भाव और नियम से पार्थिव शिवलिंग बनाकर सोलह उपचार पूजन करते हैं, तो महादेव आपके सभी मनोरथ पूरे करते हैं।

Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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