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EPFO Pension : बुजुर्गों के सम्मान से समझौता नहीं! संसदीय पैनल ने न्यूनतम पेंशन और मजदूरी बढ़ाने पर दिया जोर

संसद की स्थायी समिति ने EPS-95 के तहत मिलने वाली ₹1000 की न्यूनतम मासिक पेंशन को नाकाफी बताते हुए इसे तत्काल बढ़ाने की सिफारिश की है। समिति ने स्पष्ट किया है कि बढ़ती महंगाई के दौर में यह राशि बुजुर्गों को सम्मानजनक जीवन देने में पूरी तरह विफल रही है।

EPFO Pension : बुजुर्गों के सम्मान से समझौता नहीं! संसदीय पैनल ने न्यूनतम पेंशन और मजदूरी बढ़ाने पर दिया जोर

HIGHLIGHTS

  • बासवराज बोम्मई की अध्यक्षता वाली समिति ने लोकसभा में सौंपी अपनी विस्तृत रिपोर्ट।
  • ₹1000 की न्यूनतम पेंशन की समीक्षा कर इसे 'लिविंग कॉस्ट' के अनुरूप बनाने का सुझाव।
  • राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी को महंगाई भत्ते से सीधे लिंक करने की वकालत।

EPFO Pension : देश के लाखों पेंशनभोगियों के लिए संसद की स्थायी समिति ने बड़ी पैरवी की है। श्रम, वस्त्र और कौशल विकास संबंधी समिति ने दो टूक कहा है कि एंप्लॉयीज पेंशन स्कीम (EPS-1995) के तहत दी जा रही ₹1000 की न्यूनतम मासिक पेंशन आज के दौर में पूरी तरह बेमानी हो चुकी है।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि 30-35 साल की लंबी सेवा के बाद भी इतनी मामूली राशि मिलना सामाजिक सुरक्षा के सिद्धांतों के खिलाफ है। रिपोर्ट के अनुसार, ₹1000 में एक व्यक्ति की बुनियादी दवाइयों का खर्च भी पूरा नहीं होता, जो बुजुर्गों के लिए मानसिक और आर्थिक तनाव का बड़ा कारण बन रहा है।

बासवराज बोम्मई की अध्यक्षता वाली इस समिति ने सरकार को सुझाव दिया है कि पेंशन राशि को वर्तमान महंगाई दर और जीवन स्तर के आधार पर तय किया जाना चाहिए। समिति ने यह भी रेखांकित किया कि केवल पेंशन ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी में भी संशोधन की जरूरत है ताकि कामकाजी उम्र में भी श्रमिकों की वास्तविक आय सुरक्षित रहे।

एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि वर्तमान में ईपीएफओ (EPFO) के पास करीब 78 लाख पेंशनभोगी हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा न्यूनतम पेंशन के दायरे में आता है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि ईपीएफओ के पास मौजूद ‘पेंशन फंड’ में पर्याप्त अधिशेष (Surplus) होने के बावजूद वितरण की दर को सीमित रखा गया है, जिस पर समिति ने कड़ा रुख अपनाया है।

पेंशनर्स लंबे समय से जंतर-मंतर पर न्यूनतम पेंशन को ₹7500 करने और उसे महंगाई भत्ते (DA) से जोड़ने की मांग कर रहे हैं। हालांकि सरकार ने अब तक बजटीय सीमाओं का हवाला दिया है, लेकिन संसदीय समिति की इस रिपोर्ट ने वित्त मंत्रालय पर दबाव बढ़ा दिया है। अब गेंद पूरी तरह केंद्र सरकार के पाले में है कि वह इस सिफारिश को कब लागू करती है।

जानकारों का मानना है कि केवल सरकारी पेंशन पर निर्भर रहना भविष्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। वर्तमान में पेंशन गणना के लिए वेतन की अधिकतम सीमा (Wage Ceiling) ₹15,000 तय है, जिसके कारण उच्च वेतन वालों की पेंशन भी सीमित रह जाती है। ऐसे में युवाओं को एनपीएस (NPS) या पीपीएफ (PPF) जैसे विकल्पों के जरिए अपना अलग रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार करना अनिवार्य हो गया है।

Parul Sharma

पारुल शर्मा 'दून हॉराइज़न' के बिज़नेस सेक्शन की एक अनुभवी आर्थिक एवं व्यापार संवाददाता हैं। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सेक्टर और पर्सनल फाइनेंस उनकी मुख्य बीट (Beat) है। पारुल को मार्केट के उतार-चढ़ाव और कंज्यूमर ट्रेंड्स का सटीक विश्लेषण करने में खास महारत हासिल है। वह अपनी रिपोर्टिंग में हमेशा प्रामाणिक सरकारी आंकड़ों और विश्वसनीय स्रोतों का ही इस्तेमाल करती हैं। पारुल का मुख्य उद्देश्य बजट, टैक्स नियमों और निवेश से जुड़ी अहम खबरों को बिना किसी लाग-लपेट के सीधे पाठकों तक पहुंचाना है, जिससे आम आदमी का वित्तीय ज्ञान और अधिक मजबूत हो सके।

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