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Eye Care Routine : स्क्रीन टाइम बढ़ने से आंखों में है जलन और सूखापन, आयुर्वेद के इन तरीकों से मिलेगी राहत

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Rama Pun Updated Thu, 13 Aug 2026 11:20 PM IST

लंबे स्क्रीन टाइम के कारण आंखों में थकान, जलन और सूखेपन की समस्या आम होती जा रही है। आयुर्वेद और योग के कुछ बेहद आसान तरीकों को अपनाकर आप अपनी आंखों को बिना किसी दवा के स्वस्थ और सुरक्षित रख सकते हैं।

Eye Care Routine

Eye Care Routine : ऑफिस का काम हो या दिनभर मोबाइल का इस्तेमाल, हमारी आंखों का बड़ा हिस्सा अब स्क्रीन के सामने ही बीतता है।

लगातार स्क्रीन पर नजरें टिकाए रखने से आंखों में भारीपन, सूखापन, जलन और धुंधलेपन की शिकायत होना बेहद आम बात हो चुकी है।

अगर इस पर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो आंखों की रोशनी और काम करने की क्षमता दोनों प्रभावित होती हैं।

आयुर्वेद में आंखों की सेहत को सीधा हमारी जीवनशैली और खानपान से जोड़कर देखा गया है। गलत तरीके से बैठना, कम रोशनी में पढ़ना, मौसम का बदलाव और जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम आंखों पर दबाव बढ़ाता है।

अच्छी बात यह है कि आयुर्वेद में कुछ ऐसे बेहद सरल और असरदार तरीके बताए गए हैं, जिन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल करके आप अपनी आंखों को लंबे समय तक सेहतमंद रख सकते हैं।

पैरों के तलवों की मालिश

सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन पैरों के तलवों की तेल से मालिश करने का सीधा असर हमारी आंखों पर पड़ता है। आयुर्वेद में इसे पादाभ्यंग कहा जाता है।

सोने से पहले गुनगुने गाय के घी या तिल के तेल से पैरों के तलवों की हल्की मालिश करें। यह न सिर्फ आपके पूरे शरीर की नसों को शांत करता है बल्कि आंखों की थकान और तनाव को दूर करने में भी मदद करता है।

ठंडे पानी के छींटे और सही सफाई

दिन में तीन से चार बार साफ और सामान्य ठंडे पानी से आंखों को धोना बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए मुंह में पानी भरकर आंखें खोलें और हल्के हाथ से पानी के छींटे मारें।

ऐसा करने से आंखों में फंसी धूल-मिट्टी साफ होती है, नमी बनी रहती है और आंखों को तुरंत ताजगी का अहसास होता है।

पामिंग और आंखों के छोटे अभ्यास

जब भी काम के बीच में वक्त मिले, अपनी दोनों हथेलियों को आपस में रगड़कर गरम करें और कटोरी का आकार बनाकर बंद आंखों पर रखें। ध्यान रखें कि आंखों पर सीधा दबाव न पड़े।

इस क्रिया को पामिंग कहते हैं, जो आंखों की मांसपेशियों को तुरंत आराम देती है। इसके अलावा, काम के दौरान बीच-बीच में पुतलियों को दाएं-बाएं और ऊपर-नीचे घुमाने से आंखों का रक्त संचार बेहतर रहता है।

रोजमर्रा की इन आदतों में करें बदलाव

दूरी का रखें ध्यान: पढ़ते या काम करते समय स्क्रीन और आंखों के बीच कम से कम 20 से 25 इंच की दूरी जरूर बनाए रखें।

रोशनी सही हो: कभी भी अंधेरे कमरे में मोबाइल का इस्तेमाल न करें। काम करने वाली जगह पर पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए।

20-20-20 का नियम: हर 20 मिनट के स्क्रीन टाइम के बाद 20 सेकेंड के लिए 20 फीट दूर किसी चीज को देखें।

पर्याप्त नींद लें: आंखों को खुद को रिकवर करने के लिए 7 से 8 घंटे की गहरी नींद बहुत जरूरी है।

सुबह की हल्की धूप में कुछ देर बैठना और संतुलित खानपान भी आंखों को प्राकृतिक पोषण देता है।

हालांकि, अगर आपको आंखों में लगातार दर्द, बहुत ज्यादा धुंधलापन या पानी आने की गंभीर समस्या बनी रहती है, तो खुद इलाज करने के बजाय किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

Rama Pun

रमा पुन 'दून हॉराइज़न' में हेल्थ और लाइफस्टाइल संपादक के रूप में अपनी अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं। स्वास्थ्य, फिटनेस, खानपान और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के विषयों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। रमा का फोकस हमेशा मेडिकल एक्सपर्ट्स की पुख्ता सलाह और वैज्ञानिक शोध पर आधारित (Evidence-based) खबरें लिखने पर रहता है। उनका स्पष्ट मानना है कि सेहत से जुड़ी कोई भी जानकारी शत-प्रतिशत प्रामाणिक होनी चाहिए। अपनी आकर्षक और तथ्यपरक लेखनी से वे पाठकों को एक स्वस्थ, तनावमुक्त और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित और जागरूक करती हैं।

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