Haryana : हरियाणा के राजकीय स्कूलों में मिड-डे-मील योजना के तहत काम करने वाले हजारों कुक-कम-हैल्परों के लिए मौलिक शिक्षा विभाग ने बेहद अहम आदेश जारी किए हैं। महानिदेशक मौलिक शिक्षा ने सभी जिला अधिकारियों को साफ लफ्जों में कहा है कि कुक-कम-हैल्परों से केवल मिड-डे-मील से जुड़ा काम ही लिया जाए।
विभाग ने यह कदम उन लगातार मिल रही शिकायतों के बाद उठाया है, जिसमें कहा जा रहा था कि स्कूलों में रसोइयों से अन्य कार्य भी कराए जा रहे हैं। नए आदेश के मुताबिक, अब स्कूल प्रशासन इन कर्मचारियों से रसोई के अलावा स्कूल का कोई भी दूसरा काम नहीं करवा सकेगा। महानिदेशक ने सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को ई-मेल भेजकर इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
साल में दो बार होगी स्वास्थ्य जांच
काम के बोझ को कम करने के साथ ही विभाग ने रसोइयों की सेहत पर भी ध्यान दिया है। अब कुक-कम-हैल्परों का साल में दो बार मेडिकल चेकअप कराना अनिवार्य होगा। यह जांच पूरी तरह नि:शुल्क होगी। यह फैसला स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के पुराने आदेशों के आधार पर लिया गया है, जिसे अब सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
नौकरी पर नहीं लटकेगी तलवार
शिक्षा विभाग ने नौकरी की सुरक्षा को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। अक्सर देखा जाता था कि स्कूल में बच्चों की संख्या कम होने पर कुक को हटा दिया जाता था। नए नियम के अनुसार, यदि किसी स्कूल में छात्र संख्या कम होती है और कुक-कम-हैल्पर को हटाना पड़ता है, तो उसे सीधे नौकरी से नहीं निकाला जाएगा।
अगर उसी गांव के किसी अन्य सरकारी स्कूल में कुक का पद खाली है, तो उसे वहां समायोजित (Adjust) किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे मिड-डे-मील योजना बिना किसी रुकावट के चलेगी और कर्मचारियों के साथ किसी भी स्तर पर अन्याय नहीं होगा।














