होमदेशविदेशक्राइममनोरंजनबिज़नेसऑटोमोबाइलगैजेट्सस्पोर्ट्सस्वास्थ्यलाइफस्टाइलधर्मराशिफललव राशिफलअंक राशिफलपंचांगकरियरट्रेंडिंगवीडियो
मौसम सरकारी योजना 7वां वेतन आयोगसोने चांदी का भावडीए हाईक 2026इंडियन रेलवेगणेश गोदियालमहेंद्र भट्ट पुष्कर सिंह धामी 8वां वेतन आयोगरेसिपीजब्यूटी टिप्सट्रेंडिंग टॉपिक्स

Brushing Teeth Mistakes : टूथपेस्ट ज़्यादा लगाना पड़ सकता है भारी, जानें इसके नुकसान और सही तरीका

Brushing Teeth Mistakes : अक्सर लोग दांतों को ज्यादा चमकदार बनाने के लिए ब्रश पर भरकर टूथपेस्ट लगाते हैं, लेकिन यह आदत आपके दांतों की सेहत बिगाड़ सकती है। ज्यादा पेस्ट और रगड़ने से इनेमल घिस जाता है और सेंसिटिविटी बढ़ती है। वयस्कों को केवल मटर के दाने और 3 साल से छोटे बच्चों को चावल के दाने बराबर पेस्ट का ही इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही, ब्रश करने के तुरंत बाद कुल्ला करने से बचना चाहिए।

Published on: January 26, 2026 6:52 AM
Brushing Teeth Mistakes
Join Our Whatsapp Channel

HIGHLIGHTS

  • ब्रश पर ज्यादा पेस्ट लगाने से दांत साफ होने के बजाय इनेमल (ऊपरी परत) घिसने का खतरा रहता है।
  • 3 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए 'चावल के दाने' और बड़ों के लिए 'मटर के दाने' बराबर पेस्ट ही काफी है।
  • ब्रश करने के तुरंत बाद पानी से कुल्ला न करें, सिर्फ थूक दें ताकि फ्लोराइड अपना काम कर सके।
  • बच्चों द्वारा पेस्ट निगलने से 'डेंटल फ्लोरोसिस' और पेट की गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

Brushing Teeth Mistakes : क्या आपको लगता है कि ब्रश पर जितना ज्यादा टूथपेस्ट होगा, दांत उतने ही सफेद और चमकदार बनेंगे? अगर आप भी विज्ञापनों को देखकर अपने टूथब्रश के ब्रिसल्स को पेस्ट से पूरा ढक देते हैं, तो सावधान हो जाइए।

ओरल हाइजीन की यह सबसे आम गलती आपके दांतों को साफ करने के बजाय उन्हें समय से पहले बर्बाद कर रही है।

ज्यादा पेस्ट यानी इनेमल पर हमला

ज्यादातर लोग मानते हैं कि ज्यादा झाग का मतलब बेहतर सफाई है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। बहुत ज्यादा टूथपेस्ट, खास तौर पर जब उसे कठोर ब्रश के साथ जोर-जोर से रगड़ा जाता है, तो यह ‘सैंडपेपर’ की तरह काम करता है।

इससे दांतों की सबसे ऊपरी सुरक्षात्मक परत यानी ‘इनेमल’ घिसने लगती है। इनेमल के कमजोर पड़ने से दांतों में झनझनाहट (सेंसिटिविटी), सड़न और मसूड़ों को नुकसान पहुंचता है।

इसके अलावा, फ्लोराइड की अधिकता शरीर के लिए जहरीली भी हो सकती है। अगर गलती से ज्यादा पेस्ट पेट में चला जाए, तो मतली, उल्टी और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर मामलों में यह किडनी और हृदय पर भी बुरा असर डालता है।

उम्र के हिसाब से तय करें पेस्ट की मात्रा

टूथपेस्ट का मुख्य काम दांतों को फ्लोराइड देना है, न कि मुंह में झाग भरना। वयस्कों के लिए केवल एक ‘मटर के दाने’ (Pea-sized) बराबर टूथपेस्ट काफी होता है। यह मात्रा कैविटी रोकने और दांत मजबूत बनाने के लिए पर्याप्त फ्लोराइड प्रदान करती है।

बच्चों के मामले में यह सावधानी और भी जरूरी है। 3 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सिर्फ ‘चावल के दाने’ बराबर पेस्ट का इस्तेमाल करें। वहीं, 3 से 6 साल के बच्चों को मटर के दाने जितनी मात्रा दें।

बच्चों में ब्रश करने की आदत विकसित होते समय वे अक्सर पेस्ट निगल लेते हैं। कम मात्रा रखने से ‘डेंटल फ्लोरोसिस’ का खतरा घटता है, जिसमें दांतों पर सफेद या भूरे धब्बे पड़ जाते हैं।

ब्रश करने का सही तरीका: थूकें, कुल्ला न करें

ब्रश करने के बाद हम में से ज्यादातर लोग तुरंत पानी से कुल्ला कर लेते हैं। यह तरीका गलत है। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि ब्रश करने के बाद पेस्ट को सिर्फ थूक दें, पानी से कुल्ला न करें।

कुल्ला करने से दांतों पर लगी फ्लोराइड की परत धुल जाती है और उसे इनेमल रिपेयर करने का वक्त नहीं मिल पाता। पेरेंट्स को ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे लगभग 6 साल की उम्र तक उनकी निगरानी में ही ब्रश करें।

हमेशा नरम (Soft) ब्रिसल वाला ब्रश चुनें और दिन में दो बार से ज्यादा ब्रश करने से बचें, क्योंकि अति किसी भी चीज की बुरी होती है।

Ghee Coffee Health Benefits : सुबह की शुरुआत करें घी वाली कॉफी से, सर्दियों में तेजी से घटेगा वजन

Rama Pun

रमा पुन एक प्रशिक्षित और अनुभवी लेखिका हैं, जो हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी खबरों में विशेषज्ञता रखती हैं। विभिन्न न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर 3 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, रमा पाठकों के लिए सटीक और रोचक कंटेंट तैयार करती हैं। उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी खूबी जटिल स्वास्थ्य विषयों को सरल और आम बोलचाल की भाषा में प्रस्तुत करना है, जिससे आम पाठक भी उसे आसानी से समझ सकें। 📧 Email: punr29638@gmail.com

Leave a Reply

Discover more from Doon Horizon

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading