Green Peas Side Effects : सर्दियों की गुनगुनी धूप और खाने की थाली में हरी मटर का जायका, यह कॉम्बिनेशन उत्तर भारत के लगभग हर घर की कहानी है।
बाजार में ताजा मटर आते ही मटर पनीर, पुलाव और आलू-मटर जैसी डिशेज की बहार आ जाती है। बेशक मटर में प्रोटीन, फाइबर और विटामिन्स की भरपूर मात्रा होती है, जो इसे पौष्टिक बनाती है।
लेकिन हर किसी का शरीर मटर को पचाने के लिए तैयार नहीं होता। कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों में इसका सेवन फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है।
यूरिक एसिड और जोड़ों का दर्द
अगर आप गाउट या हाई यूरिक एसिड की समस्या से जूझ रहे हैं, तो मटर का सेवन आपकी मुश्किलें बढ़ा सकता है। हरी मटर में प्यूरिन नामक तत्व पाया जाता है।
जब यह शरीर में टूटता है, तो यूरिक एसिड का स्तर तेजी से बढ़ता है। इससे जोड़ों में दर्द और सूजन की शिकायत हो सकती है, इसलिए ऐसे मरीजों को मटर सीमित मात्रा में ही खानी चाहिए।
किडनी स्टोन में बरतें सावधानी
किडनी स्टोन, विशेषकर ऑक्सेलेट स्टोन के मरीजों को अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना पड़ता है। मटर में ऑक्सेलेट की मात्रा होती है, जो पथरी के आकार को बढ़ाने में मददगार हो सकती है।
अगर आपको पहले से पथरी की शिकायत है, तो मटर का अधिक सेवन स्थिति को गंभीर बना सकता है।
पेट फूलना और गैस की समस्या
मटर में फाइबर की मात्रा अधिक होती है और इसमें कुछ कॉम्प्लेक्स शुगर भी पाए जाते हैं। जिन लोगों का पाचन तंत्र कमजोर है या जिन्हें इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS), गैस्ट्रिक और ब्लोटिंग की समस्या रहती है, उन्हें मटर खाने के बाद भारीपन महसूस हो सकता है।
ऐसे लोगों को मटर अच्छी तरह पकाकर और कम मसाले के साथ ही खानी चाहिए।
डायबिटीज और एलर्जी का खतरा
मटर एक हेल्दी सब्जी है, लेकिन इसमें नेचुरल शुगर और कार्ब्स भी होते हैं। डायबिटीज के मरीजों द्वारा इसका अधिक सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव आ सकता है, इसलिए इसे कंट्रोल्ड सर्विंग में ही लेना चाहिए।
इसके अलावा, कुछ लोगों को लेग्यूम्स (फलियों) से एलर्जी होती है। मटर खाने के बाद अगर खुजली, सूजन या सांस फूलने जैसे लक्षण दिखें, तो इसका सेवन तुरंत बंद कर देना चाहिए।
कितनी मात्रा है सुरक्षित?
सामान्य तौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए प्रतिदिन आधा कप (1/2 कप) हरी मटर सुरक्षित मानी जाती है। अगर आपको ऊपर बताई गई कोई भी स्वास्थ्य समस्या है, तो अपनी डाइट में मटर को शामिल करने से पहले डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह लेना समझदारी होगी।
सर्दियों के खानपान में स्वाद के साथ संतुलन बनाए रखना ही सेहत की कुंजी है।















