Health Tips : अक्सर लोग पान की दुकान पर कत्थे के साथ चूना लगवाकर खाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह साधारण सा दिखने वाला सफेद पेस्ट असल में ‘कैल्शियम का पावरहाउस’ है?
आयुर्वेद में चूने को दवा का दर्जा दिया गया है। सही तरीके और सही मात्रा में इसका सेवन शरीर की कई बीमारियों को दूर कर सकता है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही भारी भी पड़ सकती है।
दरअसल, चूना कैल्शियम और ऑक्सीजन का एक केमिकल मिश्रण है। जब इसे पानी में घोला जाता है तो यह ‘बुझा चूना’ यानी कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड बन जाता है।
आम भाषा में इसे लाइम वॉटर भी कहते हैं। अगर इसका सेवन नियम से किया जाए, तो यह शरीर को फौलाद बना सकता है।
सिर्फ ‘गेंहू के दाने’ बराबर ही खाएं
चूने के सेवन में सबसे महत्वपूर्ण नियम इसकी मात्रा है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार में सिर्फ ‘गेंहू के दाने’ के बराबर बुझा चूना खाना चाहिए।
इतनी सी मात्रा में करीब 500 मिलीग्राम कैल्शियम होता है, जो शरीर की जरूरतों के लिए काफी है।
इसे खाने का एक विशेष चक्र (Cycle) है। इसे लगातार एक हफ्ते खाएं, फिर एक हफ्ते का गैप दें।
इसके बाद दो, तीन और चार हफ्ते का अंतर रखकर ही इसका सेवन करें। लगातार छह महीने तक चूना खाने के बाद इसे पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।
हड्डियों और हाइट के लिए फायदेमंद
चूना कैल्शियम से भरपूर होता है, इसलिए यह हड्डियों की बीमारी ‘ऑस्टियोपोरोसिस’ से बचाने में मदद करता है। जिन लोगों को कैल्शियम की कमी के कारण जोड़ों में दर्द रहता है, उनके लिए यह बेहद लाभकारी है।
यह दांतों को भी मजबूत रखता है। बच्चों के विकास के लिए भी चूना कारगर माना गया है।
अगर बच्चों को गेंहू के दाने बराबर चूना दही या दाल में मिलाकर दिया जाए, तो इससे न केवल उनकी हड्डियां मजबूत होती हैं, बल्कि लंबाई बढ़ने में भी मदद मिलती है।
हार्ट हेल्थ और वजन घटाने में मददगार
रिपोर्ट के मुताबिक, चूना कैल्शियम के साथ-साथ विटामिन-सी का भी अच्छा स्रोत माना गया है। यह हाई ब्लड प्रेशर के असर को कम करने और हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।
जो लोग बढ़ते वजन से परेशान हैं, वे एक गिलास पानी में गेंहू के दाने से भी छोटा कण मिलाकर पी सकते हैं।
इसमें मौजूद साइट्रिक एसिड मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है, जिससे एक्स्ट्रा कैलोरी बर्न होती है और फैट कम जमा होता है। साथ ही, यह पाचन क्रिया को सुधारने में भी मदद करता है।
सावधानी: कब बन सकता है जहर?
फायदे के साथ-साथ चूने के नुकसान भी कम नहीं हैं। इसकी अधिक मात्रा शरीर के लिए खतरनाक है। चूना एसिडिक प्रकृति का होता है, इसलिए ज्यादा खाने पर उल्टी, जी मिचलाना और खाना निगलने में दिक्कत हो सकती है।
अगर किसी को खट्टे फलों से एलर्जी है, तो उसे चूना बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। इससे सांस लेने में कठिनाई, शरीर पर सूजन या पित्ती उछलने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
इसे हमेशा पानी, दही या दाल में घोलकर ही लेना चाहिए, सीधा सेवन करने से बचें।















