Vitamin Deficiency and Cold Sensitivity : क्या घर या दफ्तर में बाकी लोग सामान्य बैठे हैं, लेकिन आप रजाई या हीटर के सामने से हटने का नाम नहीं ले रहे?
अगर आपको दूसरों की तुलना में बहुत ज्यादा ठंड महसूस होती है, तो इसे केवल मौसम की बेरुखी मानकर नजरअंदाज न करें। यह आपके शरीर के भीतर हो रहे रसायनिक बदलावों और पोषण की कमी का सीधा नतीजा हो सकता है।
शरीर का तापमान नियंत्रित रखने का काम रेड ब्लड सेल्स (लाल रक्त कोशिकाएं) करती हैं। ये कोशिकाएं शरीर के टिश्यूज तक ऑक्सीजन पहुंचाती हैं।
इसी ऑक्सीजन की मदद से मेटाबॉलिज्म प्रक्रिया चलती है, जो शरीर को अंदर से गर्म रखती है। जब शरीर में विटामिन्स की कमी होती है, तो रेड ब्लड सेल्स कम हो जाते हैं और आपका ‘इंटरनल हीटर’ काम करना बंद कर देता है।
विटामिन B12: जब सेल्स का आकार बिगड़ जाए
ज्यादा ठंड लगने का एक प्रमुख कारण विटामिन B12 की कमी है। इसकी कमी से ‘मेगालोब्लास्टिक एनीमिया’ (Megaloblastic Anemia) की शिकायत हो सकती है।
इस स्थिति में शरीर में रेड ब्लड सेल्स की संख्या तो घटती ही है, साथ ही उनका आकार सामान्य से काफी बड़ा हो जाता है। सेल्स की यह खराबी शरीर को ठंड के प्रति बेहद संवेदनशील (Sensitive) बना देती है।
फोलेट (विटामिन B9): कमजोर सेल्स का निर्माण
जिसे हम आमतौर पर फोलेट कहते हैं, वह असल में विटामिन B9 है। यह शरीर में मजबूत रेड ब्लड सेल्स बनाने के लिए जिम्मेदार है। अगर शरीर में फोलेट की पर्याप्त मात्रा न हो, तो रेड ब्लड सेल्स कमजोर बनते हैं।
यह स्थिति भी लगभग वैसी ही होती है जैसी विटामिन B12 की कमी में, जिससे व्यक्ति को सामान्य तापमान में भी कंपकंपी महसूस होती है।
आयरन की कमी: महिलाओं में सबसे कॉमन वजह
सिर्फ विटामिन ही नहीं, मिनरल्स की कमी भी आपको बीमार बना सकती है। आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया खास तौर पर महिलाओं में बहुत सामान्य है। रेड ब्लड सेल्स के भीतर ‘हीमोग्लोबिन’ होता है, जो ऑक्सीजन को बांधकर पूरे शरीर में घुमाता है।
हीमोग्लोबिन बनाने के लिए आयरन जरूरी है। जब आयरन कम होता है, तो ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित होता है और नतीजा यह होता है कि हाथ-पैर हमेशा ठंडे रहते हैं।















