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New Tax Regime का ‘हिडन’ फायदा, 12 लाख से ऊपर की कमाई पर ऐसे बचाएं टैक्स

न्यू टैक्स रिजीम में ₹12 लाख से अधिक आय होने पर मार्जिनल रिलीफ एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है ताकि अतिरिक्त टैक्स कमाई से ज्यादा न हो जाए। हालांकि, आय का एक निश्चित स्तर पार करते ही यह लाभ मिलना बंद हो जाता है, जिससे टैक्स देनदारी अचानक बढ़ सकती है।

Published On: अप्रैल 4, 2026 5:03 अपराह्न
New Tax Regime का 'हिडन' फायदा, 12 लाख से ऊपर की कमाई पर ऐसे बचाएं टैक्स

HIGHLIGHTS

  • ₹12 लाख की सीमा पार करते ही मार्जिनल रिलीफ इनकम और टैक्स के अंतर को संतुलित करता है।
  • ₹13.4 लाख की सैलरी पर ₹4,750 की राहत मिलती है, जबकि ₹13.5 लाख पर कोई छूट नहीं।
  • ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद ही टैक्स योग्य आय (Taxable Income) की गणना होती है।

नई दिल्ली, 04 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। वित्त वर्ष 2024-25 के बजट प्रावधानों के बाद न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) चुनने वाले नौकरीपेशा लोगों के बीच ₹12 लाख की इनकम लिमिट को लेकर भारी कन्फ्यूजन है। दरअसल, सरकार ने ₹12 लाख तक की आय पर रिबेट देकर टैक्स शून्य कर दिया है, लेकिन जैसे ही आपकी कमाई इस आंकड़े को थोड़ा भी पार करती है, टैक्स का मीटर तेजी से घूमने लगता है।

इसी ‘डेन्जर जोन’ से बचाने के लिए इनकम टैक्स विभाग ‘मार्जिनल रिलीफ’ (Marginal Relief) का कॉन्सेप्ट लेकर आया है।

13.4 लाख और 13.5 लाख का फर्क समझिए

टैक्स की बारीकियों को समझने के लिए दो अलग-अलग सैलरी पैकेज का उदाहरण देखना जरूरी है। मान लीजिए एक कर्मचारी की सालाना आय ₹13.4 लाख है और दूसरे की ₹13.5 लाख। दोनों के बीच अंतर महज ₹10,000 का है, लेकिन टैक्स की गणना में यह अंतर जमीन-आसमान का हो जाता है। न्यू टैक्स रिजीम में मिलने वाली ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाने के बाद, पहले व्यक्ति की टैक्सेबल इनकम ₹12.65 लाख और दूसरे की ₹12.75 लाख रह जाती है।

मौजूदा स्लैब और टैक्स का बोझ

वर्तमान नियमों के तहत ₹4 लाख तक शून्य, ₹4 से ₹8 लाख पर 5%, ₹8 से ₹12 लाख पर 10% और ₹12 लाख से ऊपर की कमाई पर सीधे 15% टैक्स लगता है। इस गणित से ₹13.4 लाख की कमाई पर कुल टैक्स ₹69,750 बनता है। वहीं, ₹13.5 लाख की सैलरी वाले व्यक्ति पर ₹71,250 का टैक्स बैठता है। यहीं से मार्जिनल रिलीफ का खेल शुरू होता है।

कैसे काम करता है मार्जिनल रिलीफ?

मार्जिनल रिलीफ का सीधा सिद्धांत है कि सरकार आपसे आपकी ‘अतिरिक्त कमाई’ से ज्यादा ‘अतिरिक्त टैक्स’ नहीं वसूल सकती। ₹13.4 लाख के मामले में, ₹12 लाख की लिमिट से ऊपर व्यक्ति ने सिर्फ ₹65,000 (स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद) अतिरिक्त कमाए हैं, लेकिन टैक्स ₹69,750 बन रहा है। चूंकि टैक्स कमाई से ₹4,750 ज्यादा है, इसलिए सरकार उसे राहत देते हुए टैक्स को ₹65,000 पर ही फिक्स कर देती है।

₹13.5 लाख पर क्यों नहीं मिलती राहत?

जब सैलरी ₹13.5 लाख पहुंचती है, तो स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद ₹12 लाख से ऊपर की अतिरिक्त आय ₹75,000 होती है। इस आय पर टैक्स की गणना करने पर राशि ₹71,250 निकलती है। यहाँ आपकी अतिरिक्त कमाई टैक्स के बोझ से ज्यादा है, इसलिए नियम के मुताबिक आपको किसी भी तरह की मार्जिनल रिलीफ का फायदा नहीं मिलता और पूरा टैक्स चुकाना पड़ता है।

मिडिल क्लास के लिए टैक्स प्लानिंग का ‘सेफ्टी नेट’

टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह नियम उन लोगों के लिए लाइफबोट की तरह है जिनकी सैलरी इंक्रीमेंट के बाद ₹12 लाख के बैरियर को मामूली अंतर से पार करती है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि जैसे-जैसे आपकी आय बढ़ती जाएगी, मार्जिनल रिलीफ का फायदा कम होता जाएगा और एक स्तर के बाद यह पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इसलिए निवेश और सैलरी स्ट्रक्चर को समझते समय केवल स्लैब ही नहीं, बल्कि इस रिलीफ कैलकुलेशन को समझना भी अनिवार्य है।

Parul Sharma

पारुल शर्मा 'दून हॉराइज़न' के बिज़नेस सेक्शन की एक अनुभवी आर्थिक एवं व्यापार संवाददाता हैं। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सेक्टर और पर्सनल फाइनेंस उनकी मुख्य बीट (Beat) है। पारुल को मार्केट के उतार-चढ़ाव और कंज्यूमर ट्रेंड्स का सटीक विश्लेषण करने में खास महारत हासिल है। वह अपनी रिपोर्टिंग में हमेशा प्रामाणिक सरकारी आंकड़ों और विश्वसनीय स्रोतों का ही इस्तेमाल करती हैं। पारुल का मुख्य उद्देश्य बजट, टैक्स नियमों और निवेश से जुड़ी अहम खबरों को बिना किसी लाग-लपेट के सीधे पाठकों तक पहुंचाना है, जिससे आम आदमी का वित्तीय ज्ञान और अधिक मजबूत हो सके।

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