Sawan Shiv Puja Niyam : सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और उपासना के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस दौरान देश भर के मंदिरों और घरों में शिवलिंग का जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से महादेव जल्द प्रसन्न होते हैं। हालांकि, शिव पूजन करते समय कुछ बातों और नियमों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है।
अनजाने में की गई कुछ गलतियां पूजा के प्रभाव को कम कर सकती हैं। आइए जानते हैं कि सावन के दौरान शिव पूजा में किन चीजों से परहेज करना चाहिए।
शिवलिंग पर न चढ़ाएं नारियल पानी
अक्सर लोग पूजा में नारियल का उपयोग करते हैं, लेकिन शिवलिंग पर कभी भी नारियल के पानी से अभिषेक नहीं करना चाहिए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नारियल को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है और इसे अर्पित करने के बाद ग्रहण करना अनिवार्य होता है, जबकि शिवलिंग पर चढ़ाई गई चीजें ग्रहण नहीं की जातीं।
सिंदूर और कुमकुम अर्पित करने से बचें
भगवान शिव वैरागी और अघोर रूप में पूजे जाते हैं। सिंदूर या कुमकुम को सौभाग्य और श्रृंगार का प्रतीक माना गया है, जिसे देवी-देवताओं की पूजा में इस्तेमाल किया जाता है।
इसलिए शिवलिंग पर कभी भी कुमकुम या सिंदूर नहीं चढ़ाया जाता। इसके स्थान पर आप भस्म या चंदन का तिलक लगा सकते हैं।
तुलसी की पत्तियां न करें अर्पित
पूजा-पाठ में तुलसी का बहुत महत्व है, लेकिन शिव पूजा में तुलसी दल चढ़ाना वर्जित माना गया है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव ने जालंधर नाम के दैत्य का वध किया था, जिसकी पत्नी वृंदा (तुलसी) थीं। इसी कारण शिव जी की पूजा में तुलसी पत्तियों का प्रयोग नहीं किया जाता।
हमेशा सादे और धुले अक्षत का ही प्रयोग करें
शिवलिंग पर चावल अर्पित करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि चावल के दाने टूटे हुए न हों।
धर्म शास्त्रों में टूटे हुए चावल (खंडित अक्षत) को पूजा में इस्तेमाल करना शुभ नहीं माना गया है। हमेशा साफ, धुले और साबुत अक्षत ही अर्पित करें।
सावन में आहार और कपड़ों से जुड़े नियम
सावन के महीने में खान-पान और पहनावे की सात्विकता भी बहुत मायने रखती है:
तामसिक भोजन से दूरी: सावन के दौरान मांस, मदिरा या अत्यधिक मसालेदार भोजन का सेवन करने से बचना चाहिए।
कपड़ों का चयन: पूजा या धार्मिक अनुष्ठान के दौरान काले रंग के कपड़े पहनने से बचें। इसके बजाय सफेद, हरे, पीले या हल्के रंग के वस्त्र धारण करना बहुत शुभ माना जाता है।
वाणी पर संयम: पूजा-पाठ के साथ-साथ स्वभाव में नम्रता रखें। किसी के प्रति कठोर शब्द न बोलें, वाद-विवाद से बचें और हर किसी का सम्मान करें।
इन छोटे-छोटे नियमों का पालन करके आप अपनी पूजा को विधि-विधान से संपन्न कर सकते हैं और महादेव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।


















