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हिमाचल के इस गांव में 5 दिनों तक कपड़े नहीं पहनतीं महिलाएं, सदियों पुरानी है परंपरा

हिमाचल प्रदेश की मणिकर्ण घाटी के पीणी गांव में महिलाएं सावन के महीने में पांच दिनों तक विशेष परंपरा का पालन करती हैं। इस दौरान वे पारंपरिक वस्त्रों का त्याग कर कड़े धार्मिक नियमों के बीच रहती हैं ताकि गांव को किसी भी अशुभ घटना से बचाया जा सके।

Published On: March 20, 2026 10:49 AM
हिमाचल के इस गांव में 5 दिनों तक कपड़े नहीं पहनतीं महिलाएं, सदियों पुरानी है परंपरा

HIGHLIGHTS

  • सावन के पांच दिनों तक महिलाएं पति से बात करने और हंसने-मजाक करने से परहेज करती हैं।
  • सदियों पुरानी मान्यता के अनुसार, इन नियमों का उल्लंघन करने पर परिवार में बड़ी विपदा आ सकती है।
  • आधुनिक समय में पूर्ण निर्वस्त्र रहने की जगह महिलाएं अब ऊन से बने 'पट्टू' का उपयोग करती हैं।

कुल्लू। हिमाचल प्रदेश की मणिकर्ण घाटी अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ रहस्यमयी लोक परंपराओं के लिए भी जानी जाती है। यहां स्थित पीणी गांव में हर साल सावन के महीने में एक ऐसी परंपरा निभाई जाती है, जो बाहरी दुनिया के लिए हैरान करने वाली है।

भादो संक्रांति के दौरान गांव की महिलाएं पांच दिनों तक कपड़ों का त्याग कर देती हैं और बेहद सादगी भरा जीवन जीती हैं।

इन पांच दिनों के दौरान गांव में किसी भी प्रकार का उत्सव या शोर-शराबा वर्जित होता है। महिलाएं न केवल नए वस्त्रों का त्याग करती हैं, बल्कि वे अपने पति से बात तक नहीं करतीं और न ही मुस्कुराती हैं। ग्रामीणों का अटूट विश्वास है कि यदि इन नियमों में जरा सी भी चूक हुई, तो पूरे गांव को देवताओं के प्रकोप और किसी अनहोनी का सामना करना पड़ सकता है।

ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में इस क्षेत्र में एक राक्षस का आतंक था, जो सुंदर कपड़े पहनने वाली महिलाओं को अपना शिकार बनाता था। इस राक्षस का वध लाहुआ देवता ने किया था, जिसके बाद से ही महिलाओं ने उसकी दृष्टि से बचने के लिए कपड़े न पहनने की प्रथा शुरू की।

हालांकि, बदलते वक्त के साथ परंपरा के स्वरूप में थोड़ा बदलाव आया है और अब महिलाएं शरीर ढकने के लिए ऊन से बने पतले ‘पट्टू’ का प्रयोग करती हैं।

स्थानीय लोग इस समय को ‘काला महीना’ भी कहते हैं, जिसमें पुरुषों के लिए भी कड़े नियम लागू होते हैं। इस अवधि में पुरुष शराब या मांस का सेवन नहीं करते और अपनी पत्नियों से दूरी बनाकर रखते हैं। पीणी गांव की यह परंपरा आज भी हिमालयी लोक संस्कृति और प्राचीन किंवदंतियों के प्रति यहां के लोगों की गहरी आस्था का प्रमाण है।


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Gudiya Sagar

गुड़िया सागर 'दून हॉराइज़न' की मल्टीमीडिया और ट्रेंडिंग न्यूज़ प्रोड्यूसर हैं। वे करियर, वायरल खबरों और वीडियो जर्नलिज्म में विशेष विशेषज्ञता रखती हैं। डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स और युवाओं की पसंद को समझना गुड़िया की सबसे बड़ी ताकत है। सरकारी नौकरियों, शिक्षा और करियर से जुड़ी हर अहम जानकारी वे पूरी फैक्ट-चेकिंग के बाद ही युवाओं तक पहुंचाती हैं। इंटरनेट पर वायरल हो रही भ्रामक खबरों की सच्चाई (Fact Check) सामने लाने और वीडियो फॉर्मेट में निष्पक्ष खबरें पेश करने के लिए गुड़िया को पत्रकारिता जगत में विशेष रूप से जाना जाता है।

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