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Iran : हाथ-पैर काटने और फांसी का फरमान, ईरान सरकार ने अपनाई ‘जीरो मर्सी’ पॉलिसी

ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सरकार ने अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है. अटॉर्नी जनरल ने चेतावनी दी है कि विरोध में शामिल लोगों को ‘अल्लाह का दुश्मन’ माना जाएगा और उन्हें मौत की सजा दी जा सकती है.

Published on: January 11, 2026 2:45 PM
Iran : हाथ-पैर काटने और फांसी का फरमान, ईरान सरकार ने अपनाई 'जीरो मर्सी' पॉलिसी
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HIGHLIGHTS

  • मौत की सजा: अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने प्रदर्शनकारियों को ‘मोहारेब’ (ईश्वर का दुश्मन) घोषित किया.
  • कठोर कानून: धारा 186 और 190 के तहत हाथ-पैर काटने और फांसी जैसी सजाओं का प्रावधान.
  • मददगारों पर भी शिकंजा: प्रदर्शनकारियों का साथ देने वालों पर भी बिना दया के मुकदमा चलाने का आदेश.
  • विपक्ष की अपील: युवराज रजा पहलवी ने लोगों से पुराने राष्ट्रीय प्रतीकों के साथ सड़कों पर उतरने को कहा.

Iran : ईरान में मौलाना शासन के खिलाफ दो हफ्तों से चल रहा विरोध अब खूनी संघर्ष और कानूनी सख्ती के नए दौर में प्रवेश कर गया है. अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने साफ कर दिया है कि सड़कों पर उतरने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा.

उन्होंने चेतावनी दी है कि प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले हर व्यक्ति को ‘अल्लाह का दुश्मन’ माना जाएगा और ईरानी कानून के तहत उन्हें मृत्युदंड दिया जाएगा.

धारा 186 और 190 का खौफ

अटॉर्नी जनरल ने सीधे तौर पर ईरानी कानून की धारा 186 और 190 का हवाला दिया है. इसके मुताबिक, अगर कोई भी समूह इस्लामी गणराज्य के खिलाफ खड़ा होता है, तो उसके सदस्य और यहां तक कि उसे भड़काने वाले समर्थक भी ‘मोहारेब’ यानी ईश्वर के दुश्मन माने जाएंगे. यह नियम उन पर भी लागू होगा जो व्यक्तिगत रूप से मौके पर मौजूद नहीं हैं, लेकिन विरोध का हिस्सा हैं.

कानून के अनुच्छेद 190 में सजा का प्रावधान बेहद क्रूर है. इसमें दोषियों के लिए फांसी और मृत्युदंड के अलावा दाहिना हाथ और बायां पैर काटने या फिर स्थायी आंतरिक निर्वासन (देश निकाला) जैसी सजाएं शामिल हैं. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्यवाही बिना किसी नरमी और दया के की जाएगी.

‘बिना देरी मुकदमा चलाएं’

सरकारी टेलीविजन पर जारी बयान में दंगाइयों की मदद करने वालों को भी बराबर का दोषी बताया गया है. अमेरिका की चेतावनियों को दरकिनार करते हुए ईरान ने अभियोजकों को निर्देश दिया है कि वे बिना वक्त गंवाए अभियोग जारी करें. सरकार का मानना है कि ये लोग देशद्रोह और असुरक्षा फैलाकर विदेशी ताकतों को बढ़ावा दे रहे हैं, इसलिए इनके खिलाफ तुरंत और सख्त कानूनी एक्शन लिया जाना चाहिए.

तेहरान में ब्लैकआउट और बढ़ते आंकड़े

जमीनी हालात बदतर होते जा रहे हैं. अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, अब तक की हिंसा में 65 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 2300 से अधिक लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है.

राजधानी तेहरान में संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप कर दी गई है. इंटरनेट सेवाएं बंद हैं और गुरुवार से फोन लाइनें भी काम नहीं कर रही हैं.

इस बीच, ईरान से निर्वासित युवराज रजा पहलवी ने आंदोलन को और तेज करने की अपील की है. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शनिवार और रविवार को सड़कों पर उतरकर सार्वजनिक जगहों पर कब्जा करने का आह्वान किया. पहलवी ने लोगों से शाह के शासनकाल वाले ‘शेर-सूर्य’ के झंडे और पुराने राष्ट्रीय प्रतीकों का इस्तेमाल करने का आग्रह किया है.

Naveen Joshi

नवीन जोशी पिछले तीन वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं और यहाँ वे अंतर्राष्ट्रीय और अपराध समाचारों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वैश्विक घटनाओं पर अपनी पैनी नज़र और गहरी समझ के लिए पहचाने जाने वाले नवीन, पाठकों तक जटिल अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों को सरल और स्पष्ट भाषा में पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। 📧 Email: info.doonhorizon@gmail.com

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