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देहरादून की सड़कों से स्कूल तक: 27 और बच्चों ने छोड़ी भीख, हाथों में आई किताबें

देहरादून की सड़कों पर कल तक भिक्षा मांगने वाले बच्चों के हाथों में अब कटोरे की जगह किताबें हैं। जिला प्रशासन की मुहिम के तहत शनिवार को 27 और बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाया गया, जिससे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ने वाले बच्चों का आंकड़ा 154 पहुंच गया है।

Published on: December 27, 2025 11:23 PM
देहरादून की सड़कों से स्कूल तक: 27 और बच्चों ने छोड़ी भीख, हाथों में आई किताबें
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HIGHLIGHTS

  • शनिवार को 27 रेस्क्यू बच्चों का सरकारी स्कूलों (साधुराम और परेड ग्राउंड) में दाखिला हुआ।
  • अब तक कुल 267 बच्चों को भिक्षावृत्ति, बालश्रम और कूड़ा बीनने से मुक्त कराया गया है।
  • इंटेसिंव केयर सेंटर (ICC) में बच्चों को कंप्यूटर, संगीत और योग जैसी आधुनिक सुविधाएं मिल रही हैं।
  • डीएम सविन बंसल ने कहा- यह अभियान 'ऑटो मोड' में तब तक चलेगा जब तक एक भी बच्चा सड़क पर है।

देहरादून की सड़कों पर अंधकार में खो रहे बचपन को जिला प्रशासन ने एक नई दिशा दी है। जो हाथ कल तक रेड लाइट पर भीख मांगते थे या कूड़ा बीनते थे, अब वे कलम थामकर अपना भविष्य लिखेंगे।

शनिवार को साधुराम इंटर कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम में विधायक खजान दास और जिलाधिकारी सविन बंसल ने 27 रेस्क्यू किए गए बच्चों को स्कूल यूनिफॉर्म और स्टेशनरी देकर औपचारिक रूप से विद्यालयों में प्रवेश दिलाया। इनमें से 10 बच्चों का दाखिला राजकीय प्राथमिक विद्यालय परेड ग्राउंड और 17 बच्चों का साधुराम इंटर कॉलेज में कराया गया है।

इंटेसिंव केयर सेंटर बना बदलाव का जरिया सड़कों से रेस्क्यू करने के बाद बच्चों को सीधे स्कूल नहीं भेजा जाता, बल्कि उन्हें पहले ‘इंटेसिंव केयर सेंटर’ (ICC) में मानसिक और सामाजिक रूप से तैयार किया जाता है। प्रशासन ने दिसंबर 2024 से अब तक कुल 267 बच्चों को रेस्क्यू किया है। इनमें 83 बच्चे भिक्षावृत्ति, 117 कूड़ा बीनने वाले और 67 बालश्रम में लिप्त थे।

ICC में इन्हें कंप्यूटर, संगीत, खेल, योग और मनोरंजन जैसी आधुनिक सुविधाओं के बीच रखा गया। जब ये बच्चे मानसिक रूप से सशक्त हो गए, तब चरणबद्ध तरीके से इनका स्कूलों में दाखिला कराया गया। अब तक 154 बच्चे मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ चुके हैं।

अनुशासन और पढ़ाई के लिए बच्चे सम्मानित कार्यक्रम के दौरान इंटेंसिव केयर सेंटर में बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों का सम्मान भी हुआ। छात्र इंद्रजीत को अनुशासन और यूनिफॉर्म के लिए, छात्रा रोशनी को नियमित उपस्थिति के लिए और अनुराधा को अन्य गतिविधियों में शानदार प्रदर्शन के लिए प्रतीक चिन्ह देकर सराहा गया।

विधायक खजान दास ने प्रशासन की पीठ थपथपाते हुए कहा कि अंतिम छोर पर खड़े निसहाय बच्चों को मुख्यधारा में लाना एक पुनीत कार्य है। उन्होंने एक साल पहले शुरू हुई इस पहल के नतीजों को सुखद बताया और कहा कि इससे शहर भी भिक्षावृत्ति से मुक्त हो रहा है।

“अभी रुकना नहीं है, अभियान जारी रहेगा” जिलाधिकारी सविन बंसल ने अभिभावकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी 154 बच्चे स्कूलों से जुड़े हैं, लेकिन लक्ष्य पूर्ण सेचुरेशन का है।

डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस व्यवस्था को ‘ऑटो मोड’ में रखा जाए ताकि यह अभियान किसी एक अधिकारी के रहने या जाने पर निर्भर न रहे। प्रशासन ने बच्चों के स्कूल आने-जाने के लिए विशेष कैब की व्यवस्था भी की है और डीएम स्वयं इसकी नियमित मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

इस मौके पर अभिभावकों ने भी प्रशासन का आभार जताया। कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह, कमांडेंट होमगार्ड निर्मल जोशी और आसरा ट्रस्ट के प्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि शिक्षा ही वह हथियार है जो इन बच्चों की तकदीर बदल सकता है और इसके लिए हर संभव संसाधन जुटाए जाएंगे।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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