Dehradun Highway Garbage Cleanup : देहरादून शहर और उसके आसपास के इलाकों में स्वच्छता को लेकर जिला प्रशासन अब सख्त रुख अपना रहा है। खासकर राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे फैले कूड़े-कचरे की समस्या लंबे समय से लोगों को परेशान कर रही थी। अब जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस पर तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए हैं, ताकि ये सड़कें फिर से साफ-सुथरी और सुरक्षित हो सकें।
कूड़े की समस्या क्यों गंभीर है?
शहर के व्यस्त इलाकों जैसे रिस्पना पुल से लच्छीवाला तक, भानियावाला टोल प्लाजा, एयरपोर्ट रोड और लालतप्पड़ की सड़कों के दोनों तरफ प्लास्टिक की बोतलें, खाने के पैकेट, पॉलीथीन और अन्य कचरा बिखरा रहता है। इसी तरह रायवाला इलाके में पुराने रेलवे स्टेशन, अंडरपास और सर्विस रोड के पास भी यही हाल है।
यह कचरा न सिर्फ शहर की सुंदरता खराब करता है, बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा भी बनता है। इससे भूमिगत पानी दूषित हो रहा है, संक्रामक बीमारियां फैलने का डर बढ़ रहा है। वन क्षेत्रों के करीब होने से बंदर और जंगली हाथी जैसे जानवर सड़कों पर आने लगते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है। उत्तराखंड जैसे पर्यटन प्रधान राज्य में ऐसी गंदगी पर्यटकों पर भी बुरा असर डालती है।
कानूनी कार्रवाई का आधार क्या है?
भारत में सार्वजनिक जगहों पर गंदगी फैलाना या बाधा पैदा करना कानूनी अपराध माना जाता है। नई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 152 में इसका प्रावधान है, जो पहले की सीआरपीसी की धारा 133 के समान है। इस धारा के तहत मजिस्ट्रेट सार्वजनिक उपद्रव (न्यूसेंस) हटाने के लिए सशर्त आदेश जारी कर सकते हैं।
अगर आदेश का पालन नहीं होता, तो स्वतः आपराधिक मामला दर्ज हो जाता है। इसमें दोषी पाए जाने पर 6 महीने तक की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है। यह कानून त्वरित कार्रवाई के लिए बनाया गया है, ताकि जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य को तुरंत संरक्षण मिले।
प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
जिलाधिकारी के निर्देश पर सदर और ऋषिकेश के उप जिलाधिकारियों ने संबंधित विभागों को नोटिस जारी किए हैं। इनमें एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर, वन विभाग के अधिकारी, लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर, जिला पंचायत और रेलवे स्टेशन के अधीक्षक शामिल हैं।
इन अधिकारियों को 7 दिनों के अंदर पूरे इलाके से कचरा हटाने और स्थायी सफाई की व्यवस्था करने को कहा गया है। साथ ही, दिसंबर के मध्य में कोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए पेश होने के आदेश हैं। अगर समय पर काम नहीं हुआ या कोर्ट में अनुपालन की रिपोर्ट नहीं दी गई, तो एकतरफा फैसला हो सकता है और सख्त सजा दी जा सकती है।
तहसीलदारों की टीमों ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया और समस्या की पुष्टि की। अब नियमित जांच जारी रहेगी, ताकि दोबारा ऐसी स्थिति न बने।
आगे की उम्मीद
यह कार्रवाई स्वच्छ भारत मिशन और उत्तराखंड की हरित छवि को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उम्मीद है कि सभी विभाग मिलकर जल्द ही इन सड़कों को चमकदार बना देंगे, जिससे स्थानीय लोग और आने वाले पर्यटक दोनों राहत महसूस करेंगे।















