उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में स्थित लक्सर इलाके में एक पुलिस कांस्टेबल के साथ सड़क पर हुई झड़प ने सबको चौंका दिया है। यह घटना उस वक्त घटी जब कांस्टेबल अपने सरकारी काम से लौट रहे थे।
ऐसे मामले भारत में बढ़ते जा रहे हैं, जहां छोटी-छोटी बातों पर लोग आपा खो बैठते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक, देश में रोड रेज से जुड़ी घटनाएं हर साल हजारों में दर्ज होती हैं, और इनमें से कई में सरकारी कर्मचारी भी शामिल होते हैं। यह न सिर्फ सुरक्षा का मुद्दा है, बल्कि समाज में बढ़ते तनाव को भी दर्शाता है।
घटना कैसे हुई
कांस्टेबल देहरादून की फॉरेंसिक लैब से एक केस से जुड़े सामान जमा करके वापस लक्सर की ओर जा रहे थे। सेठपुर इलाके में पहुंचते ही उनके सामने एक ट्रैक्टर-ट्रॉली चल रही थी, जो गन्ने से भरी हुई थी। सामान्य ट्रैफिक नियमों के तहत उन्होंने हॉर्न बजाया और ओवरटेक करने की कोशिश की। लेकिन ट्रैक्टर ड्राइवर ने अचानक अपना वाहन काट दिया, जिससे टक्कर होने का खतरा पैदा हो गया। कांस्टेबल को मजबूरन अपनी गाड़ी सड़क से नीचे उतारनी पड़ी।
यहां से मामला बिगड़ गया। ट्रैक्टर वाले ने अपना वाहन बीच सड़क पर रोक लिया और कांस्टेबल पर चिल्लाने लगे। उनके साथ एक और शख्स था, जो दोनों ने मिलकर गाड़ी में बैठे कांस्टेबल पर हाथ उठाया। उन्होंने कॉलर पकड़कर बाहर खींचने की कोशिश की, जिससे वर्दी फट गई और बैज खराब हो गया। रोड रेज के ऐसे मामलों में अक्सर लोग भावनाओं में बह जाते हैं, लेकिन यहां पीड़ित एक पुलिस अधिकारी थे, जो अपने कर्तव्य निभा रहे थे।
आसपास की प्रतिक्रिया और आरोपियों की फरारी
जैसे ही शोर-शराबा हुआ, आसपास के लोग इकट्ठा हो गए। भीड़ का फायदा उठाकर ट्रैक्टर चालक और उसका साथी मौके से भाग निकले। स्थानीय लोगों से बात करने पर पता चला कि हमलावर लक्सर के ही रहने वाले हैं। ऐसे में पुलिस को उनकी पहचान करने में आसानी हो सकती है। रोड रेज के मामलों में अक्सर गवाहों की कमी होती है, लेकिन यहां भीड़ होने से जांच में मदद मिल सकती है।
शिकायत और कानूनी कदम
पीड़ित कांस्टेबल ने तुरंत लक्सर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावरों ने सरकारी काम में रुकावट डाली, गाली-गलौज की और शारीरिक हमला किया। भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत ऐसे अपराधों में जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है, खासकर जब पीड़ित एक सरकारी कर्मचारी हो।
लक्सर थाने के इंचार्ज राजीव रौथाण ने बताया कि जांच चल रही है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। यह घटना पुलिसकर्मियों की सुरक्षा पर सवाल उठाती है, जो अक्सर अकेले ड्यूटी पर होते हैं।
ऐसे मामलों से बचने के लिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सड़क पर धैर्य रखें और ट्रैफिक नियमों का पालन करें। अगर कोई विवाद हो तो पुलिस को सूचित करें, बजाय खुद हाथापाई करने के। यह घटना हमें याद दिलाती है कि सड़क सुरक्षा सबकी जिम्मेदारी है।















