Almora : उत्तराखंड के पहाड़ी जिले अल्मोड़ा में इन दिनों कुछ ऐसा हो रहा है जो अक्सर सुर्खियों में नहीं आता, लेकिन लोगों की जिंदगी को सीधे छू रहा है। पंडित हर गोविंद पंत जिला चिकित्सालय में सालों से बंद पड़ी कई महत्वपूर्ण सुविधाएँ एक-एक कर फिर से शुरू हो रही हैं। और इस सारी मेहनत के पीछे सिर्फ एक नाम है — सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे।
बिना शोर-शराबा, बिना धरना-प्रदर्शन, बिना किसी राजनीतिक बैनर के – सिर्फ लगन और ईमानदारी से संजय ने वो कर दिखाया जो बड़े-बड़े नेता और अफसर सालों में नहीं कर पाए।
ऑडियोमैट्री कक्ष फिर से शुरू – अब बहरेपन की जाँच घर के पास
कई सालों से अल्मोड़ा जिला अस्पताल का ऑडियोमेट्री विभाग पूरी तरह बंद पड़ा था। नतीजा यह था कि कान की सुनने की क्षमता की जाँच करवाने के लिए मरीजों को हल्द्वानी या दिल्ली तक जाना पड़ता था। अब संजय पाण्डे की कोशिशों से न सिर्फ पुराना विभाग फिर से चालू हुआ है, बल्कि एक नया आधुनिक ऑडियोमेट्री कक्ष भी तेज़ी से बन रहा है।
इससे सैकड़ों बच्चे और बुजुर्ग जो पहले इलाज से वंचित रह जाते थे, अब स्थानीय स्तर पर ही सही जाँच और इलाज पा रहे हैं।
लेप्रोस्कोपिक और ENT सर्जरी अब अल्मोड़ा में ही संभव
पहले अगर पेट में पथरी, गॉल ब्लैडर या कोई बड़ा ऑपरेशन होता था तो मरीज को हल्द्वानी या देहरादून भागना पड़ता था। अब संजय पाण्डे की पहल से जिला अस्पताल में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की सुविधा शुरू हो चुकी है। हर हफ्ते औसतन 6 से 7 मरीजों का छोटे छेद वाली आधुनिक सर्जरी सफलतापूर्वक हो रही है।
इसी तरह नाक, कान और गले की एंडोस्कोपिक सर्जरी भी अब यहीं होने लगी है। कान का पर्दा फटने की समस्या वाले मरीजों के लिए अब एंडोस्कोपिक तरीके से नया पर्दा लगाया जा रहा है – जो पहले अल्मोड़ा में नामुमकिन था। इससे दर्द कम होता है, ठीक होने में समय कम लगता है और सफलता दर भी ज्यादा है।
महिला अस्पताल में फिर शुरू हुई सर्जिकल सुविधा
शहर के महिला अस्पताल में कई सालों से सर्जरी बंद पड़ी थी। प्रसव के बाद होने वाली जटिलताओं या अन्य महिलाओं की सर्जरी के लिए भी बाहर जाना पड़ता था। संजय पाण्डे ने लगातार अधिकारियों से बात कर इस सुविधा को फिर से शुरू करवाया। अब महिलाएँ सुरक्षित और भरोसेमंद इलाज स्थानीय स्तर पर ही पा रही हैं।
खराब मशीनें ठीक, नई मशीनों का प्रस्ताव पास होने की राह पर
अस्पताल की पुरानी एक्स-रे मशीन का प्रिंटर महीनों से खराब था, जिससे मरीजों को रिपोर्ट लेने में भारी परेशानी हो रही थी। अब वो भी ठीक हो चुका है।
साथ ही संजय पाण्डे ने नई डिजिटल एक्स-रे मशीन, आधुनिक कलर डॉपलर और बेहतर ऑडियोमेट्री उपकरण के लिए प्रस्ताव तैयार करवाकर उच्च अधिकारियों तक पहुँचाया है। ये प्रस्ताव मंजूरी के अंतिम चरण में हैं। जल्द ही अल्मोड़ा के मरीजों को ये सुविधाएँ भी मिलने वाली हैं।
बिना राजनीति, बिना शोर – सिर्फ सेवा का जज़्बा
सबसे खास बात यह है कि संजय पाण्डे ने ये सब कुछ बिना किसी राजनीतिक दल का झंडा उठाए किया। न स्टेज, न माइक, न फोटो सेशन। सिर्फ फाइलें लेकर दफ्तरों के चक्कर, अधिकारियों से लगातार मीटिंग और मरीजों की तकलीफ को अपनी तकलीफ समझकर काम।
वो इन सारी सफलताओं का श्रेय अपने दिवंगत माता-पिता और ईश्वर की कृपा को देते हैं। उनका कहना है कि अगर एक व्यक्ति भी सही दिश्त से मेहनत करे तो पहाड़ के दूरस्थ इलाकों में भी बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।
अल्मोड़ा की जनता अब उम्मीद भरी नजरों से देख रही है कि आने वाले दिनों में उनका जिला अस्पताल और मजबूत बनेगा। और इसके पीछे एक आम इंसान की असाधारण कोशिश है।















