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Ankita Bhandari Case Update : वायरल ऑडियो पर पुलिस का ‘ओपन चैलेंज’, सबूत हैं तो सामने आएं

अंकिता भंडारी हत्याकांड में वायरल हो रहे नए ऑडियो क्लिप और सोशल मीडिया के दावों पर उत्तराखंड पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। एडीजी कानून-व्यवस्था ने स्पष्ट किया है कि इंटरनेट पर भ्रम फैलाने के बजाय, अगर किसी के पास ठोस सबूत हैं तो वे सीधे जांच एजेंसी को सौंपें।

Published on: December 27, 2025 9:59 PM
Ankita Bhandari Case Update : वायरल ऑडियो पर पुलिस का 'ओपन चैलेंज', सबूत हैं तो सामने आएं
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HIGHLIGHTS

  • सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो क्लिप को लेकर पुलिस ने दो नई एफआईआर दर्ज की हैं।
  • एडीजी वी. मुरुगेशन ने कहा- सुप्रीम कोर्ट भी एसआईटी जांच पर संतोष जता चुका है।
  • दोषियों को आजीवन कारावास हो चुका है, मामला अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
  • पुलिस की अपील: भ्रामक तथ्य न फैलाएं, साक्ष्य हैं तो जांच एजेंसियों के सामने आएं।

अंकिता भंडारी केस में एक बार फिर सोशल मीडिया पर हलचल तेज है। वायरल हो रहे नए ऑडियो क्लिप और तरह-तरह के दावों के बीच उत्तराखंड पुलिस ने अब आर-पार का रुख अपना लिया है। अपर पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेशन ने साफ शब्दों में कहा है कि इंटरनेट पर भ्रामक तथ्य फैलाने से न्याय नहीं मिलेगा।

उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति के पास इस केस से जुड़ा कोई नया सच या ठोस सबूत है, तो वह सोशल मीडिया पर बहस करने के बजाय जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराए।

कोर्ट की निगरानी और पुलिस की कार्रवाई एडीजी ने घटनाक्रम को याद दिलाते हुए कहा कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ही सरकार ने तत्काल एक महिला आईपीएस के नेतृत्व में एसआईटी गठित की थी। पुलिस ने इतनी प्रभावी पैरवी की कि आरोपियों को जमानत तक नहीं मिली और निचली अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

जांच की गुणवत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मामला नैनीताल हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गया। दोनों ही शीर्ष अदालतों ने एसआईटी की जांच को निष्पक्ष माना और सीबीआई जांच की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया।

वायरल क्लिप पर दो एफआईआर दर्ज हालिया विवाद पर पुलिस ने बताया कि सोशल मीडिया पर चल रहे ऑडियो क्लिप्स को गंभीरता से लिया गया है। इस संबंध में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनकी गहन विवेचना जारी है। डॉ. मुरुगेशन ने जनता को एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य याद दिलाते हुए कहा कि जांच का रास्ता अभी भी बंद नहीं हुआ है।

वर्तमान में यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि सरकार की मंशा एकदम साफ है—दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा। अगर अब भी कोई प्रामाणिक जानकारी किसी के पास है, तो उसे जांच एजेंसियों के साथ साझा करें ताकि कानून अपना काम कर सके।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. 📧 Email: harpreetssoni9@gmail.com

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