उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में हाल ही में महिला एवं बाल विकास विभाग की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने की, जहां उन्होंने विभाग के अधिकारियों से राज्य की महिलाओं और बच्चों की बेहतरी के लिए कई अहम मुद्दों पर बात की।
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में, जहां भौगोलिक चुनौतियां रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती हैं, ऐसे फैसले महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और विकास को मजबूत बनाने में बड़ा योगदान दे सकते हैं। बैठक में लिए गए निर्णयों से साफ है कि सरकार ग्रामीण स्तर पर काम करने वाली महिलाओं की मदद पर फोकस कर रही है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए बढ़ी रिटायरमेंट सुविधा
आंगनबाड़ी केंद्र ग्रामीण इलाकों में बच्चों और महिलाओं के पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा का आधार हैं। यहां काम करने वाली सेविकाओं को अब रिटायरमेंट पर बेहतर सहायता मिलेगी। मंत्री रेखा आर्य ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि अगले वित्तीय वर्ष से, यानी 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर, रिटायर होने वाली हर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को कम से कम एक लाख रुपये की राशि दी जाए।
पहले यह राशि सिर्फ 35 से 40 हजार रुपये तक होती थी, जो सेविकाओं की लंबी सेवा के मुकाबले कम मानी जाती थी। विभाग लंबे समय से इस बढ़ोतरी के लिए काम कर रहा था। इस योजना में सेविकाओं को हर महीने 300 रुपये का योगदान देना होगा, और उनके संगठनों से सहमति मिलने के बाद ही यह लागू हो सकेगा। यह बदलाव न सिर्फ सेविकाओं की वित्तीय स्थिरता बढ़ाएगा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को सरकारी नौकरियों में ज्यादा प्रोत्साहन देगा।
एकल महिलाओं के लिए स्वरोजगार योजना में तेजी
उत्तराखंड में धामी सरकार ने पहले एकल महिलाओं के लिए स्वरोजगार योजना शुरू की थी, जो विधवाओं या अकेली महिलाओं को अपना कारोबार शुरू करने में मदद करती है। बैठक में इस योजना के लंबित लाभों पर चर्चा हुई। अब तक छह जिलों में 504 आवेदनों को मंजूरी मिल चुकी है, और बाकी जिलों में भी प्रक्रिया तेजी से चल रही है। मंत्री ने बताया कि जनवरी के पहले हफ्ते में इन स्वीकृत आवेदनों पर फंड जारी कर दिया जाएगा।
यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण है, क्योंकि उत्तराखंड में कई महिलाएं परिवार की जिम्मेदारी अकेले संभालती हैं। इससे न सिर्फ उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।
नंदा गौरा योजना से हजारों लड़कियों को लाभ
नंदा गौरा योजना उत्तराखंड की बेटियों के लिए एक लोकप्रिय स्कीम है, जो उनकी शिक्षा और विकास के लिए आर्थिक मदद प्रदान करती है। इस साल योजना के तहत अब तक 45,000 से ज्यादा आवेदन आ चुके हैं, जो अब तक का रिकॉर्ड है। आवेदन की आखिरी तारीख 20 दिसंबर है, और उम्मीद है कि यह संख्या और बढ़ेगी।
मंत्री रेखा आर्य ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 15 जनवरी से सभी योग्य आवेदकों को पैसा वितरित कर दिया जाए। यह योजना राज्य में लड़कियों की शिक्षा दर को बढ़ाने में मदद कर रही है, जहां पहाड़ी इलाकों में स्कूल पहुंचना चुनौतीपूर्ण होता है। इससे परिवारों को बेटियों की पढ़ाई पर ज्यादा निवेश करने का हौसला मिलता है।
आंगनबाड़ी सेविकाओं के प्रमोशन पर फोकस
बैठक में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की करियर ग्रोथ पर भी ध्यान दिया गया। मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि आंगनबाड़ी से सुपरवाइजर पद पर प्रमोशन की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए।
विभाग में फिलहाल 88 ऐसे पद खाली हैं, और अगले एक हफ्ते में इसकी अधिसूचना जारी हो जाएगी। यह कदम सेविकाओं को बेहतर पदों पर पहुंचने का मौका देगा, जो उनकी मेहनत का सम्मान है। उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां महिलाओं की भागीदारी सरकारी योजनाओं में महत्वपूर्ण है, ऐसे प्रमोशन मोटिवेशन बढ़ाते हैं।
दूरदराज इलाकों में वृद्ध महिलाओं के लिए नई योजनाएं
उत्तराखंड की विषम भौगोलिक स्थिति में दूरस्थ गांवों की वृद्ध महिलाएं अक्सर अकेलापन और आर्थिक मुश्किलों का सामना करती हैं। बैठक में ऐसी महिलाओं को भावनात्मक, सामाजिक और वित्तीय सहयोग देने वाली योजनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अगले साल नई स्कीम्स लॉन्च की जाएं।
इसके लिए शुरुआती तौर पर 8 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। यह पहल न सिर्फ बुजुर्ग महिलाओं की जिंदगी आसान बनाएगी, बल्कि समुदाय को मजबूत करेगी। राज्य सरकार का यह प्रयास महिलाओं के समग्र विकास को दर्शाता है, जहां हर उम्र की जरूरतों का ख्याल रखा जा रहा है।















