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Uttarakhand : उत्तराखंड के लिए बड़ी खुशखबरी, रोजगार गारंटी में अब 90% पैसा देगी केंद्र सरकार

Published on: December 21, 2025 11:01 PM
Uttarakhand : उत्तराखंड के लिए बड़ी खुशखबरी, रोजगार गारंटी में अब 90% पैसा देगी केंद्र सरकार
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देहरादून, उत्तराखंड : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने वाले ‘विकसित भारत-जी राम जी’ (VB-Jee Ram Jee) विधेयक, 2025 को अपनी मंजूरी दे दी है। यह नया कानून पुराने महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGA) की जगह लेगा और गांवों में रोजगार के अधिकार को और मजबूत करेगा। सबसे बड़ी राहत की खबर यह है कि अब ग्रामीण परिवारों को साल में 100 नहीं, बल्कि पूरे 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी।

यह अधिनियम सिर्फ नाम का बदलाव नहीं है, बल्कि विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया एक बड़ा ढांचा है। नए कानून के तहत उत्तराखंड जैसे हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए एक विशेष प्रावधान किया गया है। इन राज्यों में योजना को लागू करने का 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार उठाएगी, जबकि राज्य सरकार को केवल 10 प्रतिशत हिस्सा देना होगा। यह निर्णय पहाड़ी क्षेत्रों में विकास कार्यों को तेजी देने में मददगार साबित होगा।

गांवाें में अब योजनाएं ऊपर से थोपी नहीं जाएंगी। विकास का खाका तैयार करने की पूरी ताकत ग्राम सभाओं और पंचायतों के पास होगी। ‘विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं’ के तहत गांव के लोग खुद तय करेंगे कि उन्हें सड़क चाहिए, पानी की टंकी या कोई और सुविधा। इन योजनाओं को पीएम गति शक्ति जैसे नेशनल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा ताकि सरकारी पैसे का सही इस्तेमाल हो और दोहरी मेहनत से बचा जा सके।

खेती-किसानी के समय मजदूरों की किल्लत न हो, इसका भी इस कानून में विशेष ध्यान रखा गया है। राज्य सरकारें बुवाई और कटाई के पीक सीजन के दौरान 60 दिनों की ‘विराम अवधि’ घोषित कर सकती हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मजदूरों का हक मारा जाएगा। श्रमिक अपना 125 दिनों का रोजगार बाकी बचे महीनों में मांग सकेंगे। यह व्यवस्था किसानों और मजदूरों दोनों के हितों को संतुलित करती है।

मजदूरों को अब पगार के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। कानून में साफ लिखा है कि मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर या काम खत्म होने के 15 दिनों के भीतर हर हाल में करना होगा। अगर प्रशासन भुगतान में देरी करता है, तो उसे मजदूरों को हर्जाना देना होगा। पैसे सीधे बैंक खातों में जाएंगे, जिससे बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

सरकार का जोर अब सिर्फ कच्चे काम या गड्ढे खुदवाने पर नहीं है। इस अधिनियम के तहत जल संरक्षण, पक्के रास्ते और आजीविका बढ़ाने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस किया जाएगा। जो भी संपत्ति बनेगी, उसकी जियो-टैगिंग होगी और उसे राष्ट्रीय ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सरकारी पैसा पानी की तरह बहने के बजाय गांव के लिए ठोस संपत्ति बनकर खड़ा हो।

प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए भी बड़े बदलाव किए गए हैं। योजनाओं को लागू करने के लिए प्रशासनिक खर्च की सीमा 6 फीसदी से बढ़ाकर 9 फीसदी कर दी गई है। इसका सीधा फायदा मैदानी स्तर के कर्मचारियों को मिलेगा, जिन्हें बेहतर ट्रेनिंग और संसाधन मिल सकेंगे। बायोमेट्रिक उपस्थिति और सोशल ऑडिट के जरिए पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जाएगी ताकि भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश न रहे।

बेरोजगारी भत्ते को लेकर भी नियम सख्त किए गए हैं। अगर किसी मजदूर ने काम मांगा और उसे 15 दिन के भीतर रोजगार नहीं मिला, तो उसे बेरोजगारी भत्ता पाने का पूरा अधिकार होगा। पुराने कानून की जटिलताओं को हटाकर इसे मजदूरों के लिए बेहद सरल और सुरक्षित बनाया गया है, जिससे ग्रामीण भारत में आर्थिक सुरक्षा का एक नया चक्र शुरू होगा।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. 📧 Email: harpreetssoni9@gmail.com

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