देहरादून : उत्तराखंड में रियल एस्टेट सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। खासकर देहरादून जैसे शहरों में नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की भरमार है। लेकिन कई बार बिल्डर नियमों की अनदेखी करते हैं, जिससे घर खरीदारों को परेशानी होती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी UK RERA ने बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में देहरादून के कई प्रोजेक्ट्स से जुड़े बिल्डरों को नोटिस जारी किए गए हैं।
कॉमन एरिया का रजिस्ट्रेशन क्यों जरूरी है?
जब कोई बिल्डर हाउसिंग सोसाइटी या अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स बनाता है, तो उसमें पार्क, लिफ्ट, स्टेयरकेस, क्लब हाउस, पार्किंग जैसी सुविधाएं होती हैं। इन्हें कॉमन एरिया कहा जाता है।
रियल एस्टेट एक्ट 2016 के तहत इन कॉमन एरियाज का मालिकाना हक निवासियों की एसोसिएशन यानी रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) को ट्रांसफर करना अनिवार्य है। इससे सोसाइटी के लोग खुद इन सुविधाओं का रखरखाव और प्रबंधन कर सकते हैं।
प्रोजेक्ट पूरा होने और कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिलने के बाद यह काम जल्दी करना चाहिए। लेकिन कई बिल्डर इसे टालते रहते हैं, जो गलत है।
उत्तराखंड में कितने प्रोजेक्ट्स प्रभावित?
- राज्य में अभी सैकड़ों रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स RERA के साथ रजिस्टर्ड हैं। इनमें से कई ने कंप्लीशन सर्टिफिकेट भी ले लिया है।
- फिर भी कुछ प्रोजेक्ट्स में कॉमन एरियाज का ट्रांसफर नहीं हुआ। UK RERA ने ऐसे मामलों की जांच की और देहरादून के दर्जनों बिल्डरों को चेतावनी दी है।
- अगर बिल्डर जल्दी नियम नहीं मानते, तो आगे सख्त कार्रवाई हो सकती है। इससे न सिर्फ प्रोजेक्ट्स की विश्वसनीयता प्रभावित होती है, बल्कि अथॉरिटी को भी आर्थिक नुकसान होता है।
घर खरीदारों के लिए क्या फायदा?
- यह कार्रवाई घर खरीदारों के हित में है। RERA का मुख्य उद्देश्य ही पारदर्शिता लाना और बिल्डरों की मनमानी रोकना है।
- अब निवासी खुद अपनी सोसाइटी की सुविधाओं पर नियंत्रण रख सकते हैं। रखरखाव बेहतर होगा और विवाद कम होंगे।
- अगर आप उत्तराखंड में फ्लैट या प्लॉट खरीदने की सोच रहे हैं, तो हमेशा चेक करें कि प्रोजेक्ट RERA रजिस्टर्ड है या नहीं। साथ ही कॉमन एरियाज के ट्रांसफर की स्थिति भी देखें।















