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उत्तरकाशी में भालू परिवार का सीसीटीवी वीडियो वायरल, ग्रामीणों में दहशत

Published on: December 20, 2025 2:25 PM
उत्तरकाशी में भालू परिवार का सीसीटीवी वीडियो वायरल, ग्रामीणों में दहशत
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उत्तरकाशी : उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में भालुओं की गतिविधियां इन दिनों काफी बढ़ गई हैं। खासकर भटवाड़ी इलाके के आसपास के गांवों में लोग अब शाम ढलते ही घरों से बाहर निकलने से डरने लगे हैं। जंगलों से सटे इन गांवों में भालू खाने की तलाश में आबादी के करीब पहुंच रहे हैं, जिससे ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।

हाल ही में भटवाड़ी ब्लॉक के एक गांव में रात के समय एक मादा भालू अपने दो शावकों के साथ एक घर के आंगन में पहुंच गई। यह पूरी घटना घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। वीडियो में साफ दिख रहा है कि भालू परिवार आराम से आंगन में घूम रहा था। शावक आपस में खेलते-लड़ते नजर आ रहे थे, और मां उन्हें अलग करती दिखी। काफी देर तक वे वहां रहे, जैसे भोजन की तलाश में हों। शुक्र है कि घरवाले अंदर थे, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

यह कोई अकेली घटना नहीं है। उत्तरकाशी के भटवाड़ी क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों में भालुओं के हमले बढ़े हैं। पहले भी यहां भालू के डर से भागते समय दो महिलाओं की जान जा चुकी है, जब वे जंगल से लकड़ी या घास लेने गई थीं। ग्रामीण बताते हैं कि वन विभाग से शिकायत करने के बावजूद ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे, जिससे डर और बढ़ रहा है।

क्यों बढ़ रहा है भालू-इंसान संघर्ष?

उत्तराखंड में हिमालयी काला भालू मुख्य रूप से पाया जाता है। ये आमतौर पर फल, जड़ें और कीड़े खाते हैं, लेकिन भोजन की कमी होने पर गांवों की ओर आ जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन एक बड़ा कारण है। कम बर्फबारी और गर्म सर्दियां होने से भालू अपनी शीत निद्रा पूरी नहीं कर पाते, और ज्यादा सक्रिय रहते हैं। जंगलों में प्राकृतिक भोजन कम होने से वे कचरा या फसलों की तलाश में इंसानी बस्तियों में घुस आते हैं।

आंकड़ों की बात करें तो राज्य में पिछले 25 सालों में भालू के हमलों से 70 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों घायल हुए हैं। सिर्फ 2025 में ही दर्जनों हमले सामने आए हैं, जिनमें कई जानलेवा साबित हुए। उत्तरकाशी, पौड़ी, चमोली जैसे जिलों में यह समस्या सबसे गंभीर है।

ग्रामीण क्या करें सावधानी के लिए?

ऐसे में ग्रामीणों को सतर्क रहना जरूरी है। शाम के बाद अकेले बाहर न निकलें, खासकर महिलाएं और बच्चे। घरों के आसपास कचरा न फैलाएं, क्योंकि यह भालुओं को आकर्षित करता है। अगर भालू दिखे तो शोर मचाएं या रोशनी करें, लेकिन भागें नहीं। वन विभाग से लगातार संपर्क बनाए रखें और गांव में सामूहिक गश्त की व्यवस्था करें।

यह समस्या सिर्फ एक जिले की नहीं, पूरे राज्य की है। सरकार और वन विभाग को लंबे समय के समाधान पर ध्यान देना होगा, जैसे जंगलों में भोजन स्रोत बढ़ाना और AI जैसी नई तकनीक का इस्तेमाल। तब तक सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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