Dehradun : देहरादून जिले की सड़कों पर रफ्तार का जुनून लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। पुलिस रिपोर्ट और विभागीय निरीक्षण के आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि जिले में होने वाले 76.57 फीसदी सड़क हादसों की इकलौती वजह ओवरस्पीडिंग है।
साल 2025 में दर्ज कुल 443 हादसों में से 339 दुर्घटनाएं केवल तेज गति के कारण हुईं। इन हादसों ने जिले में 207 लोगों की जिंदगी छीन ली, जबकि 248 लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
पटेलनगर और हाईवे क्षेत्र बने नए ‘डेथ जोन’
देहरादून शहर के भीतर पटेलनगर थाना क्षेत्र सबसे संवेदनशील हॉटस्पॉट बनकर उभरा है। आईएसबीटी और शिमला बाईपास रोड पर हादसों का ग्राफ कम होने के बजाय साल-दर-साल बढ़ रहा है।
पटेलनगर में साल 2023 में जहां 19 मौतें हुई थीं, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 22 तक पहुंच गया है। देहात क्षेत्रों की बात करें तो डोईवाला और ऋषिकेश के हाईवे क्षेत्र भी अत्यधिक जोखिम वाले इलाकों में शामिल हैं।
रॉन्ग साइड ड्राइविंग पर अब सीधे FIR
सड़क हादसों का दूसरा सबसे बड़ा कारण गलत दिशा में वाहन चलाना पाया गया है। एसएसपी अजय सिंह के निर्देश पर दून पुलिस ने अब केवल चालान काटने की रस्म अदायगी छोड़ दी है।
खतरनाक स्थानों पर रॉन्ग साइड ड्राइविंग करने वालों पर अब सीधे मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। विधानसभा तिराहे पर लापरवाही से स्कूटर चलाने वाले दो युवकों के खिलाफ नेहरू कॉलोनी थाने में केस दर्ज किया गया है, जो शहर के भीतर इस तरह की पहली बड़ी कार्रवाई है।
पुलिस की नई रणनीति और ब्लैक स्पॉट
एसएसपी देहरादून ने स्पष्ट किया है कि हादसों को रोकने के लिए प्रवर्तन की कार्रवाई को और अधिक सख्त बनाया जा रहा है। सड़कों पर चिन्हित किए गए ‘ब्लैक स्पॉट्स’ में सुधार का काम जारी है।
पुलिस अब चालान के साथ-साथ सड़क सुरक्षा अभियानों के जरिए चालकों को गति नियंत्रण की जिम्मेदारी समझा रही है। नशे में वाहन चलाना, मोबाइल का प्रयोग और रेड लाइट जंप करना भी पुलिस की रडार पर है।



















