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Dehradun News : सहस्त्रधारा रोड पर दुकान में काम कर रही थीं दो बच्चियां, डीएम की टीम ने बदल डाली किस्मत

देहरादून प्रशासन ने सहस्त्रधारा रोड स्थित एक दुकान से बालश्रम करती दो नाबालिग लड़कियों को रेस्क्यू किया है। डीएम सविन बंसल के निर्देश पर इन बच्चियों की काउंसलिंग कर इंटेंसिव केयर सेंटर (ICC) और साधुराम इंटर कॉलेज में दाखिला दिलाया गया। प्रशासन ने उन्हें किताबें, बैग और जूते देकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा है।

Published on: January 23, 2026 2:01 PM
Dehradun News : सहस्त्रधारा रोड पर दुकान में काम कर रही थीं दो बच्चियां, डीएम की टीम ने बदल डाली किस्मत
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HIGHLIGHTS

  • सहस्त्रधारा रोड पर दुकान में काम करती दो नाबालिग लड़कियों का रेस्क्यू।
  • परिजनों की काउंसलिंग के बाद बच्चियों को बालश्रम से मुक्त कराया गया।
  • जिला प्रशासन के इंटेंसिव केयर सेंटर (ICC) में हुआ दोनों का नामांकन।
  • साधुराम इंटर कॉलेज में दाखिला दिलाकर शुरू कराई गई औपचारिक शिक्षा।
  • डीएम सविन बंसल ने अपनाई बालश्रम के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति।
  • रेस्क्यू किए गए बच्चों को मिल रहा योग, संगीत और खेल का प्रशिक्षण।

देहरादून। राजधानी के सहस्त्रधारा रोड पर एक दुकान में काम करने को मजबूर दो बेटियों को अब प्रशासन ने नई जिंदगी दी है। जिला प्रशासन की टीम ने निरीक्षण के दौरान इन दोनों नाबालिग बालिकाओं को मौके से रेस्क्यू किया।

डीएम सविन बंसल के ‘जीरो टॉलरेंस’ अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई है, जिसका मकसद बच्चों को काम के बोझ से निकालकर स्कूल तक पहुंचाना है।

काउंसलिंग के बाद बदली राह

रेस्क्यू करने के तत्काल बाद प्रशासन ने बालिकाओं की मानसिक स्थिति को समझने के लिए उनकी काउंसलिंग की। अधिकारियों ने उनके माता-पिता से भी सीधा संवाद स्थापित किया।

परिजनों को बालश्रम के कानूनी और शारीरिक दुष्परिणामों के बारे में समझाया गया। प्रशासन की टीम ने उन्हें जागरूक किया कि गरीबी के कारण बच्चों का बचपन छीनना और उन्हें शिक्षा से दूर रखना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

ICC बना संजीवन: साधुराम कॉलेज में मिला दाखिला

इन बच्चियों के पुनर्वास में जिला प्रशासन का आधुनिक ‘इंटेंसिव केयर सेंटर’ (ICC) एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। काउंसलिंग और जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद दोनों का नामांकन पहले इस सेंटर में कराया गया। यह सेंटर बच्चों के लिए एक सुरक्षित घर की तरह काम कर रहा है।

इसके तुरंत बाद, दोनों बालिकाओं को साधुराम इंटर कॉलेज में दाखिला दिलाकर औपचारिक शिक्षा से जोड़ दिया गया। ताकि उनकी पढ़ाई में कोई रुकावट न आए, प्रशासन ने उन्हें किताबें, स्कूल बैग और जूते भी मौके पर ही उपलब्ध कराए। अब ये बच्चियां दुकान पर काम करने के बजाय स्कूल यूनिफॉर्म में अपना भविष्य संवार रही हैं।

डीएम सविन बंसल का स्पष्ट संदेश

जिलाधिकारी सविन बंसल ने साफ किया है कि जनपद में बालश्रम और भिक्षावृत्ति को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि ऐसे मामलों में नियोक्ताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो। वहीं, रेस्क्यू किए गए बच्चों को सिर्फ छुड़ाया नहीं जाएगा, बल्कि ICC के जरिए उन्हें योग, संगीत और खेल जैसी गतिविधियों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य वीरान बचपन को सुरक्षा और सम्मान देना है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. 📧 Email: harpreetssoni9@gmail.com

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