देहरादून। राजधानी के सहस्त्रधारा रोड पर एक दुकान में काम करने को मजबूर दो बेटियों को अब प्रशासन ने नई जिंदगी दी है। जिला प्रशासन की टीम ने निरीक्षण के दौरान इन दोनों नाबालिग बालिकाओं को मौके से रेस्क्यू किया।
डीएम सविन बंसल के ‘जीरो टॉलरेंस’ अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई है, जिसका मकसद बच्चों को काम के बोझ से निकालकर स्कूल तक पहुंचाना है।
काउंसलिंग के बाद बदली राह
रेस्क्यू करने के तत्काल बाद प्रशासन ने बालिकाओं की मानसिक स्थिति को समझने के लिए उनकी काउंसलिंग की। अधिकारियों ने उनके माता-पिता से भी सीधा संवाद स्थापित किया।
परिजनों को बालश्रम के कानूनी और शारीरिक दुष्परिणामों के बारे में समझाया गया। प्रशासन की टीम ने उन्हें जागरूक किया कि गरीबी के कारण बच्चों का बचपन छीनना और उन्हें शिक्षा से दूर रखना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
ICC बना संजीवन: साधुराम कॉलेज में मिला दाखिला
इन बच्चियों के पुनर्वास में जिला प्रशासन का आधुनिक ‘इंटेंसिव केयर सेंटर’ (ICC) एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। काउंसलिंग और जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद दोनों का नामांकन पहले इस सेंटर में कराया गया। यह सेंटर बच्चों के लिए एक सुरक्षित घर की तरह काम कर रहा है।
इसके तुरंत बाद, दोनों बालिकाओं को साधुराम इंटर कॉलेज में दाखिला दिलाकर औपचारिक शिक्षा से जोड़ दिया गया। ताकि उनकी पढ़ाई में कोई रुकावट न आए, प्रशासन ने उन्हें किताबें, स्कूल बैग और जूते भी मौके पर ही उपलब्ध कराए। अब ये बच्चियां दुकान पर काम करने के बजाय स्कूल यूनिफॉर्म में अपना भविष्य संवार रही हैं।
डीएम सविन बंसल का स्पष्ट संदेश
जिलाधिकारी सविन बंसल ने साफ किया है कि जनपद में बालश्रम और भिक्षावृत्ति को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि ऐसे मामलों में नियोक्ताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो। वहीं, रेस्क्यू किए गए बच्चों को सिर्फ छुड़ाया नहीं जाएगा, बल्कि ICC के जरिए उन्हें योग, संगीत और खेल जैसी गतिविधियों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य वीरान बचपन को सुरक्षा और सम्मान देना है।



















