देहरादून : सड़कों पर आज प्रशासन का बुलडोजर और क्रेन एक साथ गरजे। मुख्यमंत्री के ‘जीरो टॉलरेंस’ निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने शहर के दिल कहे जाने वाले इलाकों में अब तक का सबसे सख्त अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि सड़कों पर मनमानी अब नहीं चलेगी।
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घंटाघर से राजपुर रोड तक ताबड़तोड़ कार्रवाई
सुबह होते ही प्रशासनिक अमला सड़कों पर उतर आया। मुख्य नगर आयुक्त नमामि बंसल की अगुवाई में टीम ने घंटाघर, राजपुर रोड, एस्लेहॉल और दर्शन लाल चौक जैसे व्यस्त इलाकों को निशाना बनाया। टीम ने फुटपाथ और सड़क घेरकर खड़े सैकड़ों दोपहिया और चार पहिया वाहनों को मौके से ही जब्त कर लिया।
कनक चौक, लैंसडाउन चौक और चकराता रोड पर भी यही नजारा दिखा, जहां बेतरतीब खड़े वाहनों के तुरंत चालान काटे गए। सिर्फ वाहन ही नहीं, फुटपाथ पर कब्जा जमाए ठेली-रेहड़ी वालों और मैकेनिकल दुकानों का सामान भी प्रशासन ने जब्त कर लिया है।
आरसी रद्द करने की बड़ी चेतावनी
इस अभियान की सबसे बड़ी बात प्रशासन द्वारा दी गई नई चेतावनी है। अधिकारियों ने वाहन मालिकों को स्पष्ट कह दिया है कि फिलहाल सिर्फ चालान और जब्ती की कार्रवाई हो रही है, लेकिन यह आखिरी मौका है। अगर भविष्य में वही वाहन दोबारा फुटपाथ पर खड़ा मिला, तो उसका पंजीकरण (आरसी) सीधे निरस्त कर दिया जाएगा।
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यह फैसला उन लोगों के लिए बड़ा झटका है जो ‘नो-पार्किंग’ के बोर्ड को नजरअंदाज करने के आदी हैं। प्रशासन का मकसद सिर्फ चालान काटना नहीं, बल्कि यातायात को पूरी तरह बाधा मुक्त बनाना है।
गंदगी फैलाने वाले दुकानदारों पर भी शिकंजा
कार्रवाई सिर्फ गाड़ियों तक सीमित नहीं रही। टीम ने उन दुकानदारों की भी क्लास लगाई जो अपनी दुकान का कचरा सड़क पर फेंक रहे थे। खाने-पीने की दुकानों के बाहर डस्टबिन न मिलने पर दुकानदारों के चालान काटे गए। इसके अलावा सड़कों पर अवैध रूप से लगे पोस्टर, बैनर और होर्डिंग्स को भी हटा दिया गया।
अधिकारियों का संयुक्त ‘हल्ला बोल’
इस कार्रवाई में पूरा सरकारी तंत्र एक साथ नजर आया। सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह, आरटीओ संदीप सैनी, आरटीओ अनिता चमोला, सीओ प्रमोद कुमार और तहसीलदार प्रदीप नेगी समेत भारी पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। जिला प्रशासन ने शहरवासियों को संदेश दिया है कि फुटपाथ चलने के लिए हैं, पार्किंग के लिए नहीं। यह अभियान आगे भी बिना किसी सूचना के जारी रहेगा, ताकि आम जनता को जाम और अतिक्रमण से स्थायी राहत मिल सके।
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