उत्तराखंड की धामी सरकार ने प्रदेश के बुजुर्ग कलाकारों और साहित्यकारों को बड़ी आर्थिक सौगात दी है। सरकार ने संस्कृति विभाग के उस प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है, जिसके तहत वृद्ध और विपन्न कलाकारों की मासिक पेंशन को दोगुना करने की सिफारिश की गई थी।
अब इन कलाकारों को हर महीने तीन हजार रुपये के बजाय छह हजार रुपये की सम्मान राशि मिलेगी। कैबिनेट बैठक में लिए गए इस फैसले को प्रदेश की लोक संस्कृति को सहेजने वाले प्रहरियों के लिए एक बड़े सहारे के रूप में देखा जा रहा है।
महंगाई की मार और 15 साल का इंतजार सरकार ने इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा तर्क महंगाई को माना है। कलाकारों को दी जाने वाली पेंशन की यह दर साल 2010 में तय की गई थी। उस वक्त के हालात और आज की बाजार दरों में जमीन-आसमान का अंतर आ चुका है।
पिछले 15 सालों में महंगाई जिस रफ्तार से बढ़ी है, उसे देखते हुए तीन हजार रुपये की राशि एक बुजुर्ग कलाकार के जीवन-यापन, दवा-दारू और दैनिक खर्चों के लिए नाकाफी साबित हो रही थी। कैबिनेट के सामने रखे गए प्रस्ताव में साफ तौर पर स्वीकार किया गया कि 2010 की तुलना में वर्तमान महंगाई दर कहीं अधिक है, इसलिए पेंशन में संशोधन करना समय की मांग थी।
संस्कृति के ‘प्रहरियों’ को मिलेगा संबल इस योजना का लाभ उन कलाकारों और लेखकों को मिलेगा जो अपनी कला के जरिए उत्तराखंड की पहचान जिंदा रखे हुए हैं, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इसमें वे बुजुर्ग शामिल हैं जो प्रदेश की सांस्कृतिक परंपराओं, ऐतिहासिक क्षेत्रीय लोक कलाओं, लोक गीतों, नृत्यों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों को बजाने में निपुण हैं।
अक्सर देखा गया है कि पहाड़ की संस्कृति को अपने कंधों पर ढोने वाले ये कलाकार बुढ़ापे में घोर आर्थिक संकट का सामना करते हैं। विपन्नता के दौर में सरकार का यह फैसला उनके लिए ‘बूढ़ी लाठी’ का काम करेगा।
नई नियमावली को मिली मंजूरी संस्कृति विभाग द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव को कानूनी अमलीजामा पहनाने के लिए कैबिनेट ने नियमों में भी बदलाव किया है। इसके तहत ‘उत्तराखंड वृद्ध एवं विपन्न कलाकारों व लेखकों को मासिक पेंशन (संशोधन) नियमावली, 2025’ के प्रख्यापन को मंजूरी दी गई है।
इस नई नियमावली के लागू होते ही पात्र कलाकारों के खातों में बढ़ी हुई पेंशन राशि आना शुरू हो जाएगी। सरकार का मानना है कि साहित्य और कला को जीवित रखने के लिए यह जरूरी है कि इनका सृजन करने वाले कलाकारों का बुढ़ापा सुरक्षित और सम्मानजनक हो।















