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देहरादून में अतिक्रमण पर ‘डिजिटल स्ट्राइक’, जमीन पर कब्जा होते ही अफसर के फोन पर बजेगी घंटी

देहरादून में सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण रोकने के लिए अब 'डिजिटल अलर्ट सिस्टम' पहरेदारी करेगा। सीडीओ अभिनव शाह ने लापरवाही बरतने वाले 10 विभागों को फटकार लगाते हुए परिसंपत्तियों की मैपिंग पूरी करने के लिए एक हफ्ते का अल्टीमेटम दिया है।

Published on: December 30, 2025 1:54 PM
देहरादून में अतिक्रमण पर 'डिजिटल स्ट्राइक', जमीन पर कब्जा होते ही अफसर के फोन पर बजेगी घंटी
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HIGHLIGHTS

  • देहरादून के 63 में से केवल 14 विभागों ने पूरा किया अपनी संपत्तियों का ब्योरा।
  • एमडीडीए (MDDA), जल संस्थान और उच्च शिक्षा विभाग ने अब तक शुरू भी नहीं किया काम।
  • सरकारी जमीन पर कब्जा होते ही विभागाध्यक्ष के पास पहुंचेगा सीधा डिजिटल अलर्ट।
  • जिले में अब तक 211 संपत्तियों पर अतिक्रमण के अलर्ट मिले, सीडीओ ने जताई नाराजगी।

देहरादून : सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जे को लेकर देहरादून प्रशासन ने अब आर-पार के मूड में काम करना शुरू कर दिया है। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अभिनव शाह ने साफ कर दिया है कि सरकारी जमीनों का हिसाब न रखने वाले अधिकारियों की अब खैर नहीं होगी।

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विकास भवन में हुई समीक्षा बैठक के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जिले के 63 विभागों में से 49 विभाग अपनी ही जमीनों और इमारतों का पूरा ब्योरा तक तैयार नहीं कर पाए हैं। सीडीओ ने इसे गंभीरता से लेते हुए पेंडिंग काम को निपटाने के लिए सिर्फ एक हफ्ते का वक्त दिया है।

प्रशासन का ‘डिजिटल हथियार’ तैयार

अतिक्रमण रोकने के लिए प्रशासन ने अब तकनीक का सहारा लिया है। सीडीओ अभिनव शाह ने बताया कि सभी विभागों को अपनी परिसंपत्तियों (जमीन, भवन, सड़क, तालाब, पार्क) का ‘पॉलीगॉन’ यानी डिजिटल सीमा निर्धारण करना अनिवार्य है। जैसे ही यह डेटा पोर्टल पर अपलोड होगा, एक सुरक्षा चक्र सक्रिय हो जाएगा।

सिस्टम की खासियत यह है कि अगर कोई भी व्यक्ति मैप की गई सरकारी जमीन पर निर्माण या अतिक्रमण की कोशिश करेगा, तो उसका सीधा ‘डिजिटल अलर्ट’ संबंधित विभागाध्यक्ष के पास पहुंच जाएगा। इससे अधिकारी यह नहीं कह पाएंगे कि उन्हें अवैध कब्जे की जानकारी नहीं थी। यह सिस्टम समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित करेगा और सरकारी संपत्ति सुरक्षित रहेगी।

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10 बड़े विभागों ने काम शुरू तक नहीं किया

समीक्षा बैठक में जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी ने जो रिपोर्ट पेश की, उसने कई बड़े विभागों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जिले के 63 विभागों में से केवल 14 ने ही अपनी संपत्तियों की मैपिंग का काम 100% पूरा किया है।

हैरानी की बात यह है कि एमडीडीए (MDDA), उत्तराखंड जल विद्युत निगम, पेयजल निगम, विजिलेंस, उच्च शिक्षा, शहरी विकास निदेशालय और महिला कल्याण जैसे 10 महत्वपूर्ण विभागों ने मैपिंग का काम अभी शुरू भी नहीं किया है। वहीं, 39 विभाग ऐसे हैं जहां काम कछुआ गति से चल रहा है। सीडीओ ने इन विभागों की सुस्ती पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है।

211 अलर्ट पर कार्रवाई क्यों नहीं?

देहरादून जिले में अब तक 4,988 सार्वजनिक संपत्तियों को पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। सिस्टम के प्रभावी होने का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पोर्टल के माध्यम से अब तक अतिक्रमण के 211 अलर्ट जारी भी हो चुके हैं।

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सीडीओ अभिनव शाह ने बैठक में नाराजगी जताते हुए कहा कि कई मामलों में अलर्ट मिलने के बाद भी विभागों ने समय पर कार्रवाई नहीं की। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि जो भी अलर्ट मैसेज पोर्टल से आ रहे हैं, उन पर तुरंत संज्ञान लिया जाए। सीडीओ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि एक सप्ताह के भीतर बचा हुआ मैपिंग कार्य पूरा करें, वरना लापरवाही के लिए सीधे जिम्मेदारी तय की जाएगी।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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