देहरादून : साल 2026 की पहली सुबह देहरादून कलेक्ट्रेट में उम्मीदों का सूरज लेकर आई। जब पूरा शहर नए साल के जश्न में डूबा था, तब जिला प्रशासन उन बेटियों के आंसू पोंछ रहा था जिनके लिए स्कूल की फीस भरना पहाड़ जैसा संघर्ष बन गया था।
जिला अधिकारी (डीएम) सविन बंसल ने पूजा-पाठ के रूप में बालिकाओं की शिक्षा को चुना और प्रोजेक्ट ‘नंदा-सुनंदा’ के तहत 1.55 लाख रुपये के चेक सौंपकर चार परिवारों की खोई मुस्कान लौटा दी।
जब दर्द साझा करते हुए छलक पड़े आंसू
कलेक्ट्रेट सभागार में मौजूद हर शख्स उस वक्त भावुक हो गया जब दून विश्वविद्यालय की छात्रा जीविका अंथवाल अपनी आपबीती सुना रही थीं। जीविका के पिता लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार हैं और आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। घर की सारी जमा-पूंजी इलाज में लग गई और उच्च शिक्षा अधर में लटक गई। ऐसे मुश्किल वक्त में प्रशासन ने जीविका का हाथ थामकर उनकी पढ़ाई का रास्ता साफ किया।
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कुछ यही हाल नंदनी राजपूत का था। साल 2018 में एक हादसे ने उनसे पिता का साया छीन लिया था। मां सिलाई-बुनाई कर किसी तरह घर चला रही हैं, लेकिन 11वीं कक्षा की फीस भरने के लिए उनके हाथ तंग थे। प्रशासन की मदद ने नंदनी को फिर से अपनी कक्षा में बैठने का हौसला दिया है।
दिव्यांग माता-पिता का सहारा बनीं बेटियां
गरीबी और बीमारी का सबसे क्रूर चेहरा दिव्या और आकांशी के परिवारों ने देखा है। दिव्या के पिता एक दुर्घटना के बाद दिव्यांग हो गए और डेढ़ साल तक बिस्तर पर रहे। घर की आर्थिक स्थिति इतनी बिगड़ गई कि 9वीं कक्षा में पढ़ रही दिव्या को स्कूल छोड़ने का डर सताने लगा था।
वहीं, आकांशी धीमान और नव्या नैनवाल के परिवारों पर भी मुसीबतों का पहाड़ टूटा था। नव्या के पिता की मृत्यु के बाद शिक्षा एक बोझ बन गई थी। इन सभी की पढ़ाई अब प्रशासन के सहयोग से बिना किसी बाधा के जारी रहेगी। डीएम सविन बंसल ने इन बेटियों से संवाद करते हुए कहा कि जीवन में मुश्किलें आती हैं, लेकिन साहस से उनका सामना करना ही असली जीत है।
93 बेटियों के सपनों को मिले पंख
जिला प्रशासन का यह प्रयास महज एक दिन का दिखावा नहीं है। प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा का यह 11वां संस्करण था। प्रशासन अब तक समाज के अंतिम छोर पर खड़ी 93 बेटियों की शिक्षा को ‘पुनर्जीवित’ कर चुका है, जिसके लिए कुल 33.50 लाख रुपये की राशि खर्च की गई है।
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डीएम सविन बंसल ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के निर्देश साफ हैं—जनकल्याणकारी योजनाएं सिर्फ फाइलों में न रहें, बल्कि उनका लाभ उस व्यक्ति तक पहुंचे जिसे उसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपना लक्ष्य तय करें और मेहनत करें, आर्थिक तंगी को प्रशासन उनके आड़े नहीं आने देगा। इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस पहल को समाज सेवा का सच्चा स्वरूप बताया।













