DM Savin Bansal : दून की उन बेटियों के लिए आज का दिन उम्मीद की नई किरण लेकर आया, जिनकी पढ़ाई पिता की मृत्यु या घर की माली हालत बिगड़ने के कारण छूटने की कगार पर थी।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ के 12वें संस्करण के तहत ऐसी 26 बालिकाओं को सहारा दिया है। जिला प्रशासन ने अभिभावक की भूमिका निभाते हुए इन छात्राओं की 6.93 लाख रुपये की स्कूल और कॉलेज फीस के चेक वितरित किए। यह राशि सीधे संबंधित शिक्षण संस्थानों के खातों में ट्रांसफर की गई है।
बी.फार्मा से लेकर पीएचडी तक की पढ़ाई बचाई
इस बार मदद पाने वाली छात्राओं में केवल स्कूली बच्चियां ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा हासिल कर रही युवतियां भी शामिल हैं। डीएम ने बताया कि आज लाभान्वित हुई 26 बालिकाओं में से 10 प्राइमरी, 8 माध्यमिक और 8 उच्च शिक्षा वर्ग की हैं।
इसमें जिया (बी.फार्मा) और अनुष्का प्रजापति (एमए प्रथम वर्ष) शामिल हैं, जिनकी पढ़ाई पिता की मृत्यु के बाद फीस न भर पाने के कारण बाधित हो रही थी। प्रशासन ने जिया की 39,500 रुपये और अनुष्का की फीस जमा करवाकर उनकी डिग्री पूरी होने का रास्ता साफ किया। इसके अलावा मानसी साहू, जो जियोलॉजी में पीएचडी (चतुर्थ सेमेस्टर) कर रही हैं, उनकी 50 हजार रुपये की फीस भी प्रशासन ने जमा कराई है।
बीमारी से जूझते परिवारों को मिला संबल
प्रोजेक्ट के तहत सिर्फ अनाथ ही नहीं, बल्कि उन बेटियों को भी मदद मिली जिनके पिता गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। सृष्टि, जो बीसीए 5वें सेमेस्टर की छात्रा हैं और जिनके पिता लंबे समय से कैंसर से पीड़ित हैं, उनकी 64,043 रुपये की फीस जमा की गई। वहीं, एमएससी की छात्रा पलक घेयल, जिनके पिता भी कैंसर से लड़ रहे हैं और मां नर्सिंग होम में काम करती हैं, उनकी शिक्षा का जिम्मा भी प्रशासन ने उठाया।
इसके अतिरिक्त कक्षा 5 की समीक्षा, कक्षा 2 की हिमिका त्यागी, 11वीं की वैष्णवी नौटियाल, 12वीं की फलक अली सहित प्रभुगन कौर, किरत कौर, इशिका सिंह (बीकॉम), मदीहा बेग (बीसीए), और दिया बडोनी जैसी छात्राओं की फीस जमा कर उनकी पढ़ाई ‘पुनर्जीवित’ की गई।
डीएम बोले- इसे सरकारी नीति बनाएंगे
चेक वितरण के दौरान जिलाधिकारी सविन बंसल ने छात्राओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि शिक्षा ही सशक्तिकरण का सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सरकार से अनुरोध करेंगे कि ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ को एक नीति (Policy) के रूप में अपनाया जाए। इससे पूरे प्रदेश में ऐसी जरूरतमंद बालिकाएं, जिनकी पढ़ाई किसी मजबूरी में छूट गई है, उन्हें दोबारा मुख्यधारा से जोड़ा जा सकेगा।
‘लीजेंड्री’ स्तर पर प्रशासन का काम
कार्यक्रम में मौजूद जनगणना निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने देहरादून प्रशासन के इस कार्य को ‘लीजेंड्री’ (अभूतपूर्व) बताया। उन्होंने छात्राओं से अपील की कि वे सफल होने पर ‘हेल्पिंग हैंड’ बनें और भविष्य में अन्य जरूरतमंदों की मदद करें। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि जिन बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित की जाती है, प्रशासन उनका लगातार फॉलोअप भी लेता है ताकि उनकी पढ़ाई बीच में न रुके।
इस मौके पर जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास जितेंद्र कुमार, सीडीपीओ और बालिकाओं के परिजन भी मौजूद रहे। अब तक इस योजना के जरिए करीब 1 करोड़ रुपये खर्च कर 120 बेटियों का भविष्य सवांरा जा चुका है।



















