देहरादून में वकीलों का गुस्सा सोमवार को सड़क पर उतर आया. बार एसोसिएशन ने अपनी मांगों को लेकर घंटाघर का घेराव किया, जिससे शहर की रफ्तार थम गई. वकीलों ने साफ कर दिया है कि उन्हें अब महज जुबानी आश्वासन नहीं, बल्कि सरकार से लिखित आदेश चाहिए.
घंटाघर पर हुए इस प्रदर्शन से पूरे इलाके में लंबा जाम लग गया और आम जनता को भारी परेशानी झेलनी पड़ी. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा. दरअसल, अधिवक्ता पिछले एक महीने से हरिद्वार रोड पर नई कोर्ट के सामने धरना दे रहे हैं. उनका कहना है कि शासन-प्रशासन ने कई बार उनकी मांगें मानने की बात कही, लेकिन लिखित में कुछ नहीं दिया. इसी वादाखिलाफी के विरोध में 22 दिसंबर को घंटाघर पर यह उग्र प्रदर्शन किया गया.
धारा 223 का उल्लंघन और वकीलों की दलील
शहर में लगातार हो रहे प्रदर्शनों को देखते हुए एसएसपी ने घंटाघर क्षेत्र में बीएनएस की धारा 223 लागू की थी. इसके तहत बिना अनुमति प्रदर्शन पर रोक है, लेकिन वकीलों ने इसकी परवाह नहीं की. अधिवक्ताओं ने दो टूक कहा कि सरकार का काम मुकदमे करना है और वे इससे डरने वाले नहीं हैं.
क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा मामला जिला जज न्यायालय परिसर में रैन बसेरा बनाए जाने के विरोध से जुड़ा है. बार एसोसिएशन का तर्क है कि कोर्ट परिसर में जगह की भारी कमी है. यहां 5 हजार अधिवक्ता, इतने ही टाइपिस्ट और वेंडर रोजाना आते हैं. इसके अलावा हजारों वादकारियों की भी आवाजाही रहती है. वकीलों की मांग है कि रैन बसेरा बनाने के बजाय सिविल कंपाउंड हरिद्वार रोड की जमीन उन्हें चैंबर निर्माण के लिए दी जाए, क्योंकि मौजूदा जगह नाकाफी साबित हो रही है.
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान कई अधिकारी उनसे मिलने आए, लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नहीं पहुंचे. उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी या तो सीएम को सही बात समझा नहीं पा रहे या सीएम समझना नहीं चाहते. उनकी मांगों को अभी तक कैबिनेट में भी नहीं रखा गया है. कंडवाल ने चेतावनी दी है कि अगर मांग पूरी नहीं हुई, तो बार एसोसिएशन चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को और तेज करेगा.















