देहरादून : आज की डिजिटल दुनिया में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने जहां लोगों को जोड़ा है, वहीं कुछ लोग इनका दुरुपयोग करके गंभीर अपराध कर रहे हैं। हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां टेलीग्राम ऐप पर एक चैनल के जरिए बच्चियों के अश्लील वीडियो बेचे जा रहे थे। इस खबर ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और तमिलनाडु की पुलिस को सतर्क कर दिया है। ये प्लेटफॉर्म, जो मैसेजिंग और ग्रुप्स के लिए जाना जाता है, अब अपराधियों के लिए एक छिपा हुआ बाजार बन गया है, जहां वे थंबनेल दिखाकर बोली लगाते हैं और सामग्री बेचते हैं।
पुलिस की जांच कैसे शुरू हुई
देहरादून पुलिस को साइबर पोर्टल पर संदिग्ध लिंक मिलने के बाद इस मामले की पड़ताल शुरू हुई। जांच में मेरठ के बागपत गेट इलाके के रहने वाले अमित जैन का नाम उभरा। ब्रह्मपुरी थाने में रिपोर्ट दर्ज होने के साथ ही पुलिस ने आरोपी की खोजबीन तेज कर दी। अमित ने टेलीग्राम पर ‘लूसिफर’ नाम से अकाउंट बनाया था, जहां वह बच्चियों के वीडियो के स्क्रीनशॉट शेयर करता था और फिर उनकी कीमत तय करके सौदा करता था। पुलिस ने चैनल को बंद करवा दिया है, लेकिन आरोपी फरार है और उसका फोन बंद पाया गया है।
तमिलनाडु कनेक्शन और बैंक खाते पर कार्रवाई
इस मामले की जड़ें सिर्फ उत्तर भारत तक सीमित नहीं हैं। जांच से पता चला कि अमित ने तमिलनाडु में भी ऐसी सामग्री बेची थी। एक महीने पहले उसके बैंक खाते में 20 हजार रुपये ट्रांसफर हुए थे, जो इसी धंधे से जुड़े थे। तमिलनाडु पुलिस ने तुरंत उसके खाते को फ्रीज कर दिया और आगे की जांच शुरू की। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के लेन-देन से अपराधियों के नेटवर्क का पता चलता है, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में फैला हुआ है।
साथियों का नेटवर्क और व्यापक जांच
पुलिस की शुरुआती जांच में अमित के सोशल मीडिया अकाउंट्स से कई और लोगों के नाम सामने आए हैं, जो इस अवैध कारोबार में शामिल हो सकते हैं। अकाउंट में मैसेजेस से सौदेबाजी के सबूत मिले हैं, जहां मूल सामग्री होने का दावा करके लाखों रुपये में वीडियो बेचे जा रहे थे।
ब्रह्मपुरी पुलिस अब तमिलनाडु और देहरादून पुलिस के साथ मिलकर काम कर रही है। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि साइबर टीम अब ऐसे सभी अकाउंट्स पर नजर रख रही है, ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों को रोका जा सके।
ऑनलाइन बच्चे शोषण की बढ़ती समस्या
ये मामला भारत में ऑनलाइन बच्चे शोषण की बढ़ती चुनौती को दर्शाता है। 2025 के ‘इंटू द लाइट इंडेक्स’ रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशिया में हर आठ में से एक बच्चा यौन शोषण का शिकार हुआ है, जिसमें ऑनलाइन सामग्री का बड़ा हिस्सा है।
UNICEF की रिपोर्ट्स भी बताती हैं कि ऐसे अपराध घर, स्कूल या ऑनलाइन कहीं भी हो सकते हैं।
पुलिस की साइबर निगरानी बढ़ाने से उम्मीद है कि ऐसे नेटवर्क्स को तोड़ा जा सकेगा, लेकिन अभिभावकों को भी बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर ध्यान देना जरूरी है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अनजान लिंक्स से दूर रहें और संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट करें।
आगे क्या होगा
पुलिस अब अमित और उसके साथियों को पकड़ने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। ये मामला दिखाता है कि कैसे तीन राज्यों की पुलिस मिलकर ऐसे अपराधों से लड़ रही है। अगर आप भी ऐसी कोई संदिग्ध गतिविधि देखें, तो तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करें। इससे न सिर्फ अपराधी पकड़े जाएंगे, बल्कि बच्चों की सुरक्षा भी मजबूत होगी।



















