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IMA Passing Out Parade 2025 : IMA पासिंग आउट परेड कल, 525 कैडेट्स बनेंगे अफसर

Published on: December 12, 2025 10:32 PM
IMA Passing Out Parade 2025 : IMA पासिंग आउट परेड कल, 525 कैडेट्स बनेंगे अफसर
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देहरादून : हर साल दिसंबर का महीना देहरादून में कुछ खास होता है। ठंडी हवाएं चलती हैं, कोहरा छाया रहता है, लेकिन भारतीय सैन्य अकादमी का ड्रिल स्क्वायर गर्मी और जोश से भर जाता है। इस बार भी 13 दिसंबर 2025 को सुबह ठीक 9 बजे जब “क्विक मार्च” की कमांड गूंजेगी, तो पूरा देश एक बार फिर गर्व से सीना चौड़ा करेगा। क्योंकि इस दिन 525 युवा कैडेट्स अफसर बनकर निकलेंगे – जिनमें से 491 हमारे अपने देश के हैं और 34 विदेशी मित्र देशों के।

93 साल पुरानी परंपरा, आज भी वैसी ही शान

भारतीय सैन्य अकादमी की नींव 1932 में रखी गई थी। तब से लेकर अब तक इसने करीब 67 हजार अफसर भारतीय सेना को दिए हैं। कई युद्ध लड़े गए, कई वीरगाथाएं लिखी गईं – और हर बार IMA के जेंटलमैन कैडेट्स ने अपना नाम रोशन किया। आज भी यही अकादमी सबसे कठिन ट्रेनिंग के लिए जानी जाती है। सुबह 4 बजे उठना, 40 किलो वजन के साथ दौड़ना, रात-रात भर फील्ड में रहना – ये सब इन युवाओं ने 18 महीने तक झेला है। अब जब वे अंतिम कदम बढ़ा रहे हैं, तो उनके चेहरों पर थकान नहीं, सिर्फ गर्व नजर आता है।

इस बार की परेड इसलिए भी खास है क्योंकि रिव्यूइंग ऑफिसर खुद थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी होंगे। यानी जिनकी कमांड में ये नए अफसर देश की सेवा करेंगे, वही उनके सामने सलामी लेंगे और उनका संदेश सुनेंगे। यह पल हर कैडेट के लिए जिंदगी भर याद रहने वाला होता है। सेना प्रमुख का सामने होना जैसे यह बताता है – अब तुम हमारी जिम्मेदारी हो।

सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया के 14 देशों के कैडेट्स भी होंगे शामिल

IMA की खासियत यह भी है कि यहां सिर्फ भारतीय ही नहीं, विदेशी कैडेट्स भी ट्रेनिंग लेते हैं। इस बैच में अफगानिस्तान, भूटान, मालदीव, मॉरीशस, नेपाल, श्रीलंका, तजाकिस्तान जैसे 14 देशों के 34 युवा भी पास आउट हो रहे हैं। ये कैडेट्स अपने देश लौटकर अपनी सेनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई बार तो भारत और इन देशों के बीच सैन्य रिश्ते इन्हीं कैडेट्स की दोस्ती से और मजबूत होते हैं।

परेड के बाद क्या होता है?

पासिंग आउट परेड खत्म होते ही कैडेट्स की टोपी हवा में उछाली जाती है। उसके बाद “अंतिम कदम” मार्च होता है, जिसमें वे अकादमी के मुख्य गेट से बाहर निकलते हैं – अब अफसर बनकर। फिर शुरू होता है पोस्टिंग का इंतजार। कोई इंफैंट्री में जाएगा, कोई आर्टिलरी में, कोई आर्मर्ड कोर में। लेकिन सबके दिल में एक ही बात – अब देश की रक्षा हमारी जिम्मेदारी है।

यह परेड सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि उन हजारों घंटों की मेहनत का फल है जो इन युवाओं ने चुपचाप की। माता-पिता की आंखों में आंसू, दोस्तों का गर्व और पूरे देश का सम्मान – ये सब कुछ 13 दिसंबर को एक साथ देखने को मिलेगा।

Prateek Sharma

प्रतीक शर्मा एक तकनीक-प्रेमी लेखक हैं, जो मोबाइल और टेक्नोलॉजी जगत की गहरी समझ रखते हैं। इनोवेशन (नवाचार) के प्रति अपने जुनून के चलते, वह टेक्नोलॉजी के नवीनतम ट्रेंड्स, नए गैजेट लॉन्च और तकनीकी प्रगति पर विस्तृत व ज्ञानवर्धक लेख तैयार करते हैं। उनकी लेखन शैली की खासियत यह है कि वह जटिल तकनीकी विषयों को भी बेहद सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं। प्रतीक शर्मा पिछले चार वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं। 📧 Email: pratiksharma903@gmail.com

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