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Kotdwar : कॉर्बेट से सटे गांवों में दहशत फैलाने वाला बाघ ट्रैंकुलाइज, पिंजरे में हुआ कैद

Published on: December 14, 2025 2:46 PM
Kotdwar : कॉर्बेट से सटे गांवों में दहशत फैलाने वाला बाघ ट्रैंकुलाइज, पिंजरे में हुआ कैद
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उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में जयहरीखाल क्षेत्र के पास कई दिनों से लोगों के दिलों में डर बैठा हुआ था। एक बाघ ने इलाके को दहशत में डाल रखा था, लेकिन अब वन विभाग की मेहनत रंग लाई है। टीम ने इस खतरनाक बाघ को सफलतापूर्वक पकड़ लिया है, जिससे आसपास के गांवों में रहने वाले लोग काफी सुकून महसूस कर रहे हैं।

क्या हुई थी शुरुआत की घटना

यह सब तब शुरू हुआ जब 5 दिसंबर को अमलेसा ग्राम पंचायत के डाल्यूंगाज गांव में 60 साल की उर्मिला देवी चारा इकट्ठा कर रही थीं। अचानक बाघ ने उन पर हमला कर दिया और उनकी जान ले ली। यह दर्दनाक हादसा इलाके के लिए झटके जैसा था। उसके बाद बाघ बार-बार जगह बदलता रहा, जिससे लोगों का बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया था। गांव वाले दिन-रात डरे सहमे रहते थे।

वन विभाग की मुस्तैदी और ऑपरेशन

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की विशेष टीम ने इस मामले को गंभीरता से लिया। डॉक्टर दुष्यंत कुमार की अगुवाई में रेस्क्यू दल ने लगातार दो दिनों तक बाघ पर नजर रखी। आखिरकार रविवार सुबह करीब तीन बजे सिरोबाड़ी गांव के पास मौका मिला। टीम ने बेहोशी की दवा का इंजेक्शन लगाकर बाघ को काबू किया और फिर उसे पिंजरे में सुरक्षित रखा। बाद में इसे कॉर्बेट के ढेला क्षेत्र में ले जाया गया, जहां उसकी देखभाल और आगे की जांच हो रही है।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की खासियत

कॉर्बेट भारत का सबसे पुराना नेशनल पार्क है, जो बाघों की सबसे ज्यादा घनत्व वाली जगहों में से एक माना जाता है। यहां करीब 260 से ज्यादा बाघ हैं, जो पूरे देश में संरक्षण की सफलता दिखाता है। लेकिन जंगल के किनारे बसे गांवों में कभी-कभी बाघ इंसानी इलाकों में आ जाते हैं। ऐसा अक्सर तब होता है जब वे शिकार की तलाश में भटकते हैं या घायल हो जाते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि बाघों और इंसानों के बीच टकराव कम करने के लिए जागरूकता और सतर्कता जरूरी है।

इलाके में अभी भी सावधानी बरतने की जरूरत

हालांकि इस बाघ के पकड़े जाने से बड़ी राहत मिली है, लेकिन स्थानीय लोग बताते हैं कि क्षेत्र में तेंदुए भी काफी सक्रिय हैं। गांव के प्रधान और पूर्व प्रधानों का कहना है कि जंगल के पास कई जंगली जानवर घूमते रहते हैं, इसलिए पूरी तरह निश्चिंत होने का वक्त अभी नहीं आया। वन विभाग लोगों को सलाह दे रहा है कि जंगल के करीब जाते समय समूह में रहें और शोर मचाकर सतर्क रहें।

यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाना कितना महत्वपूर्ण है। बाघों का संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है, लेकिन अपनी सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी। उम्मीद है कि ऐसे प्रयासों से आगे ऐसे हादसे कम होंगे।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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