देहरादून में वकीलों का आंदोलन अब एक नए मोड़ पर पहुंच चुका है। शहर के व्यस्त इलाकों में बढ़ते ट्रैफिक और पर्यटकों की भीड़ के बीच, अधिवक्ता अपनी लंबित मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। यह स्थिति तब और दिलचस्प हो जाती है, जब कानून की रक्षा करने वाले और उसे लागू करने वाले एक ही जगह पर आमने-सामने आ सकते हैं।
वकीलों की समस्या की जड़ें
देहरादून के बार एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ता पिछले करीब एक महीने से नए न्यायालय परिसर के सामने अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। यहां रोजाना हजारों लोग आते-जाते हैं, जिसमें लगभग 5,000 वकील, इतने ही टाइपिस्ट और वेंडर शामिल हैं। इसके अलावा, मुकदमों से जुड़े लोग भी लगातार यहां पहुंचते हैं।
लेकिन परिसर में जगह की भारी कमी है, जिससे कामकाज में दिक्कतें आ रही हैं। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का मानना है कि मौजूदा आवंटित भूमि पर्याप्त नहीं है, और इससे दैनिक काम प्रभावित हो रहा है।
मांगें और बातचीत का सिलसिला
अधिवक्ताओं की मुख्य मांग है कि चैंबर बनाने के लिए अतिरिक्त जमीन दी जाए। खासतौर पर, हरिद्वार रोड पर सिविल कंपाउंड की भूमि को उनके लिए उपलब्ध कराया जाए। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल ने बताया कि कई दौर की चर्चाओं के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला। अधिकारियों से मिले वादों पर अमल नहीं हुआ, जिससे हताशा बढ़ गई। हालांकि, एसोसिएशन ने अपनी हड़ताल को फिलहाल टाल दिया है, लेकिन अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे आगे कदम उठाने को मजबूर होंगे।
22 दिसंबर का प्लान
अब अधिवक्ताओं ने 22 दिसंबर को घंटाघर पर पूरे दिन प्रदर्शन करने का फैसला किया है। यह शहर का एक प्रमुख चौराहा है, जहां रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं। बार एसोसिएशन का कहना है कि वे अपनी मांगों को मनवाने के लिए घेराव करेंगे, भले ही पुलिस की ओर से रोक लगाई गई हो। अगर बात नहीं बनी, तो आंदोलन और तेज हो सकता है। यह फैसला शहर की शांति और व्यवस्था के लिए एक चुनौती बन सकता है।
पुलिस की सख्ती का कारण
दूसरी तरफ, देहरादून के एसएसपी अजय सिंह ने घंटाघर समेत कई प्रमुख जगहों पर बीएनएस की धारा 223 लागू कर दी है। यह धारा अनधिकृत सभाओं, जुलूसों या नारेबाजी पर रोक लगाती है, और उल्लंघन पर मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। पुलिस का तर्क है कि सर्दियों का मौसम, क्रिसमस और नए साल की छुट्टियां चल रही हैं। इस दौरान पर्यटकों की बड़ी संख्या में शहर पहुंचने की उम्मीद है। साथ ही, शादियों का सीजन भी है, जिससे ट्रैफिक पहले ही प्रभावित है। प्रदर्शनों से जाम लगने से आम लोगों को परेशानी होती है।
पर्यटन और शहर की चुनौतियां
देहरादून उत्तराखंड की राजधानी है और मसूरी, ऋषिकेश जैसे पर्यटक स्थलों का गेटवे। हर साल लाखों पर्यटक यहां आते हैं, खासकर सर्दियों में। स्कूलों की छुट्टियां और त्योहारों का समय ट्रैफिक को और बढ़ा देता है। पुलिस ने गांधी पार्क, परेड ग्राउंड और आसपास के चौराहों जैसे कनक चौक, एस्ले हॉल चौक पर भी इसी तरह की पाबंदियां लगाई हैं। बिना अनुमति लाउडस्पीकर इस्तेमाल करने पर भी कार्रवाई होगी।
आगे की संभावनाएं
यह टकराव देहरादून की न्यायिक व्यवस्था और शहर प्रबंधन के बीच संतुलन की परीक्षा लेगा। एक तरफ वकीलों की जायज मांगें हैं, जो उनके कामकाज की बुनियाद से जुड़ी हैं। दूसरी तरफ, पुलिस की जिम्मेदारी है कि शहर सुचारू रूप से चले। अगर बातचीत से हल निकला, तो बेहतर, वरना आंदोलन बड़ा रूप ले सकता है। स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को सलाह है कि 22 दिसंबर को प्रमुख इलाकों में सावधानी बरतें।















