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Lok Adalat Dehradun : मिनटों में हल होंगे चालान-लोन केस, अब समाधान होगा तुरंत, ऐसे करें आवेदन

Published on: December 11, 2025 8:04 PM
Lok Adalat Dehradun : मिनटों में हल होंगे चालान-लोन केस, अब समाधान होगा तुरंत, ऐसे करें आवेदन
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Lok Adalat Dehradun : भारत में न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लोक अदालत जैसी पहलें सालों से चल रही हैं। ये अदालतें आम लोगों को लंबे मुकदमों से बचाकर तुरंत समाधान देती हैं, जिससे अदालतों पर बोझ कम होता है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से पूरे देश में 13 दिसंबर को एक बड़ा लोक अदालत कार्यक्रम हो रहा है।

उत्तराखंड भी इसमें शामिल है, जहां सभी जिलों और तहसील स्तर पर यह आयोजन होगा। इससे पहले की लोक अदालतों ने यहां के लोगों को काफी फायदा पहुंचाया है, खासकर छोटे-मोटे विवादों में।

देहरादून में लोक अदालत का विशेष महत्व

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में लोक अदालत ने हमेशा अच्छे नतीजे दिए हैं। यहां की जिला अदालत में मुकदमों की संख्या लगातार घट रही है। सितंबर में हुई आखिरी लोक अदालत के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि लंबित मामलों की गिनती एक लाख से नीचे आई। यह एक बड़ी कामयाबी है, जो दिखाती है कि लोग अब इन अदालतों पर भरोसा करने लगे हैं।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की प्रमुख और जिला न्यायाधीश सीमा डूंगराकोटी ने बताया कि इस बार का कार्यक्रम देहरादून के मुख्यालय के अलावा विकास नगर, ऋषिकेश, चकराता, मसूरी और डोईवाला जैसे इलाकों में भी होगा। समय सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक रहेगा।

कौन-कौन से मामले सुलझ सकते हैं

लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य छोटे और समझौते योग्य मामलों को जल्दी निपटाना है। अगर आपके पास अदालत में लंबित कोई केस है, तो यह आपके लिए सुनहरा मौका हो सकता है। मिसाल के तौर पर, छोटे आपराधिक विवाद जैसे झगड़े या मारपीट से जुड़े मामले यहां आसानी से हल हो जाते हैं।

बैंक से जुड़े चेक बाउंस केस भी इसमें शामिल हैं। सबसे ज्यादा फायदा सिविल मामलों और मोटर वाहन अधिनियम से जुड़े विवादों में मिलता है। इससे लोग महंगे और लंबे मुकदमों से बच जाते हैं।

राहत के विभिन्न प्रकार

इस अदालत में कई तरह के केस कवर होते हैं। आपराधिक मामलों में जहां समझौता संभव हो, जैसे छोटी धोखाधड़ी या विवाद। धारा 138 के तहत चेक बाउंस से जुड़े मुकदमे। सड़क हादसों से संबंधित मुआवजा दावे। परिवारिक अदालतों के मामले, लेकिन तलाक को छोड़कर। मजदूरों के अधिकारों से जुड़े विवाद। जमीन अधिग्रहण के मसले। सिविल सूट, राजस्व संबंधी दावे। बिजली और पानी के बिलों पर झगड़े, लेकिन गंभीर मामलों को छोड़कर।

वेतन, पेंशन या रिटायरमेंट लाभ से जुड़े केस। कर्ज वसूली के विवाद। और कोई भी ऐसा मसला जो आपसी सहमति से सुलझाया जा सके। ये सभी लोक अदालत की ताकत दिखाते हैं कि कैसे साधारण लोग बिना ज्यादा खर्च के न्याय पा सकते हैं।

मोटर वाहन नियमों में मिलने वाली छूट

देहरादून में सबसे ज्यादा मामले यातायात नियम तोड़ने से जुड़े आते हैं। न्यायाधीश सीमा डूंगराकोटी ने समझाया कि हेलमेट न पहनना, रेड लाइट पार करना या तेज रफ्तार जैसे उल्लंघनों पर चालान कटते हैं। इनमें जुर्माना काफी ज्यादा होता है, लेकिन लोक अदालत में करीब आधा हिस्सा माफ हो सकता है। इससे लोगों को आर्थिक राहत मिलती है। अगर आपके पास ऐसा चालान है, तो संबंधित अदालत से इसे ले लें और लोक अदालत में आवेदन करें। यह प्रक्रिया सरल है और समय बचाती है।

बिजली और पानी बिलों पर फोकस

उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में बिजली और पानी के बिलों से जुड़े विवाद आम हैं। लोक अदालत इन पर भी ध्यान देती है। अगर बिल ज्यादा आ गया है या भुगतान में देरी हुई है, तो यहां बातचीत से समाधान निकल सकता है। इससे अदालतों में जाने की जरूरत नहीं पड़ती और पैसे की बचत होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम पर्यावरण और संसाधन प्रबंधन में भी मददगार साबित होते हैं, क्योंकि विवाद जल्दी सुलझने से सेवाएं बेहतर चलती हैं।

आवेदन कैसे करें

अगर आप लोक अदालत का फायदा उठाना चाहते हैं, तो देहरादून के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय में जाएं। वहां हर तरह की जानकारी मिलेगी। आपके केस के बारे में बताएं, वे मार्गदर्शन देंगे। फोन पर संपर्क करने के लिए नंबर 0135-2520873 है, या मोबाइल 9458346961 पर कॉल करें। ईमेल dehradundlsa13@gmail.com पर भी पूछताछ कर सकते हैं। यह सब मुफ्त है और आम लोगों के लिए बनाया गया है।

अदालतों पर बोझ कम करने की सफलता

उत्तराखंड में लोक अदालत की लोकप्रियता बढ़ रही है। इस साल मार्च में 8 हजार, मई में 10 हजार और सितंबर में 14 हजार मामलों का निपटारा एक ही दिन में हुआ। यह संख्या बताती है कि लोग अब पारंपरिक अदालतों की बजाय इन पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं।

इसके अलावा, प्री-लिटिगेशन केस जैसे बैंक लोन या ईएमआई विवाद, जो अदालत पहुंचने से पहले ही सुलझ जाते हैं। सितंबर में ऐसे 7 हजार मामले हल हुए। कुल मिलाकर, लोक अदालत न्याय व्यवस्था को तेज और सुलभ बना रही है, जिससे समाज में शांति बढ़ती है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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