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Non-Hindu Ban : केदारनाथ में गैर-हिंदुओं पर रोक की तैयारी, क्या सिख और जैन भी नहीं कर पाएंगे बद्रीनाथ दर्शन?

चार धाम यात्रा शुरू होने से पहले उत्तराखंड के प्रमुख मंदिरों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) आगामी बैठक में अपने अधीन आने वाले 46 मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव लाने जा रही है। समिति का तर्क है कि यह निर्णय आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित परंपराओं और मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए लिया जा रहा है।

Published on: January 27, 2026 11:11 PM
Non-Hindu Ban : केदारनाथ में गैर-हिंदुओं पर रोक की तैयारी, क्या सिख और जैन भी नहीं कर पाएंगे बद्रीनाथ दर्शन?
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HIGHLIGHTS

  1. बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने पुष्टि की है कि आगामी बैठक में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन करने का प्रस्ताव लाया जाएगा।
  2. यह प्रतिबंध बद्रीनाथ, केदारनाथ समेत समिति के अधिकार क्षेत्र वाले सभी 46 मंदिरों पर लागू हो सकता है।
  3. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संविधान के अनुसार सिख, जैन और बौद्ध धर्म के लोग हिंदू धर्म का ही हिस्सा हैं, इसलिए उन पर रोक नहीं होगी।
  4. समिति ने 'लैंड जिहाद' और 'थूक जिहाद' जैसी घटनाओं को इस सख्ती की मुख्य वजह बताया है।

Non-Hindu Ban : उत्तराखंड में चार धाम यात्रा की तैयारियों के बीच मंदिरों की सुरक्षा और परंपराओं को लेकर एक अहम सुगबुगाहट तेज हो गई है। बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने की तैयारी चल रही है।

श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने संकेत दिया है कि प्रदेश के प्रमुख मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया जाना जरूरी हो गया है।

पुजारियों और हितधारकों की मांग

हेमंत द्विवेदी ने जानकारी दी कि राज्य के प्रमुख मंदिरों से जुड़े हितधारक (Stakeholders) और पुजारी लंबे समय से यह मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि धामों की आध्यात्मिक गरिमा और पवित्रता को सुरक्षित रखने के लिए गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित होना चाहिए।

इसी को ध्यान में रखते हुए, बीकेटीसी अपनी आगामी बैठक में एक औपचारिक प्रस्ताव लाने जा रही है। यदि यह प्रस्ताव पास होता है, तो समिति के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी 46 मंदिरों में यह नियम लागू कर दिया जाएगा।

‘यह कोई नया फरमान नहीं है’

बीकेटीसी अध्यक्ष ने इस निर्णय को ऐतिहासिक संदर्भ से जोड़ते हुए स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई नया नियम नहीं बनाया है। यह व्यवस्था तो आदि शंकराचार्य के समय से ही चली आ रही है।

उन्होंने कहा कि यहां की धार्मिक परंपराएं, प्राचीन मान्यताएं और आस्था आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित नियमों के अनुरूप ही हैं। प्रशासन केवल उसी पुरानी व्यवस्था को सख्ती से लागू करने पर विचार कर रहा है।

क्यों पड़ी सख्ती की जरूरत?

इस निर्णय के पीछे के कारणों पर बात करते हुए हेमंत द्विवेदी ने राज्य में हालिया घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि समय की मांग को देखते हुए यह फैसला लेना पड़ रहा है।

उनके अनुसार, कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा ‘अवैध मजार’, ‘थूक जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ जैसी गतिविधियों के जरिए माहौल खराब करने की कोशिश की गई है। ऐसे में पुजारियों और स्थानीय लोगों की मांग थी कि गैर-हिंदुओं को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए।

सिख और जैन श्रद्धालुओं पर क्या होगा असर?

केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में बड़ी संख्या में सिख और जैन श्रद्धालु भी दर्शन के लिए आते हैं। इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए द्विवेदी ने कहा कि संविधान के प्रावधानों के अनुसार, सिख, जैन और बौद्ध मत को मानने वाले लोग हिंदू धर्म का ही अभिन्न हिस्सा हैं। अतः इन श्रद्धालुओं के दर्शन-पूजन पर कोई भी रोक नहीं होगी और वे पूर्ववत आ सकेंगे।

हरिद्वार में भी उठी है मांग

पहाड़ों के अलावा मैदानी इलाकों में भी ऐसी ही मांग जोर पकड़ रही है। हरिद्वार में हर की पौड़ी और गंगा घाटों का प्रबंधन देखने वाली संस्था ‘गंगा सभा’ ने भी कड़ा रुख अपनाया है।

संस्था ने मांग की है कि अगले साल होने वाले अर्धकुंभ से पहले कुंभ क्षेत्र के सभी गंगा घाटों और धार्मिक स्थलों पर गैर-हिंदुओं का प्रवेश रोका जाए। हाल ही में हर की पौड़ी क्षेत्र में ‘अहिंदुओं का प्रवेश निषेध’ लिखे पोस्टर लगाकर इस अभियान की शुरुआत भी कर दी गई है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. 📧 Email: harpreetssoni9@gmail.com

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