देहरादून : दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों का मौसम आते ही हवा की गुणवत्ता में गिरावट एक बड़ी समस्या बन जाती है। इस बार भी राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर इतना ऊंचा पहुंच गया है कि लोगों का रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है। योग गुरु बाबा रामदेव ने हाल ही में इस मुद्दे पर अपनी राय रखी, जिसमें उन्होंने प्रदूषण से निपटने के पारंपरिक तरीकों पर जोर दिया और कुछ आधुनिक उपकरणों को महज दिखावा बताया। आइए समझते हैं कि क्या कहा रामदेव ने और प्रदूषण की इस स्थिति में क्या हैं विशेषज्ञों की सलाहें।
प्रदूषण की गंभीर स्थिति
दिल्ली में वायु प्रदूषण साल दर साल एक चुनौती बना हुआ है, खासकर नवंबर-दिसंबर के महीनों में जब फसल अवशेष जलाना, वाहनों का धुआं और निर्माण कार्यों की धूल हवा को जहरीला बना देते हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों से पता चलता है कि हाल ही में एक दिन का औसत एक्यूआई 431 तक पहुंच गया, जो इस साल का सबसे खराब स्तर है।
यह 11 नवंबर के 428 के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ चुका है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में भी स्थिति ‘गंभीर’ श्रेणी में बनी रह सकती है। ऐसे में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी जीआरएपी के तीसरे चरण को फिर से लागू किया गया है, जिसमें आधे कर्मचारियों को घर से काम करने और स्कूलों को मिश्रित मोड में चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
रामदेव की अनोखी सलाह
एक टीवी इंटरव्यू में जब रामदेव से पूछा गया कि इतने खराब प्रदूषण में लोग बाहर कैसे व्यायाम कर सकते हैं, तो उन्होंने विकास की प्रक्रिया को इसका हिस्सा बताया। उनका कहना था कि जब कोई देश आगे बढ़ रहा होता है, तो थोड़ी-बहुत धूल-मिट्टी तो फैलेगी ही। उन्होंने सुझाव दिया कि घरों में पर्दों को बंद रखें और उन्हें हर 15-20 दिनों में साफ करते रहें।
साथ ही, मास्क का इस्तेमाल जरूरी है। रामदेव ने जोर देकर कहा कि घर के अंदर रहकर ही प्राणायाम जैसे व्यायाम किए जा सकते हैं, जैसे अनुलोम-विलोम और कपालभाति। ये तरीके न सिर्फ फेफड़ों को मजबूत बनाते हैं बल्कि प्रदूषण के असर को कम करने में मददगार साबित होते हैं। जब एयर प्यूरिफायर की बढ़ती मांग पर सवाल हुआ, तो उन्होंने इसे अमीरों की सनक करार दिया, मानो यह कोई जरूरी चीज न हो बल्कि एक फैशन हो।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ क्या कहते हैं
दूसरी तरफ, हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आलोक जैसे डॉक्टर प्रदूषण से बचाव के लिए व्यावहारिक उपाय सुझाते हैं। उन्होंने बताया कि बाहर जाते समय एन-95 मास्क पहनना जरूरी है, जो हानिकारक कणों को रोकता है। घर के अंदर हवा को साफ रखने के लिए इंडोर प्लांट्स लगाने की सलाह दी जाती है, जैसे स्नेक प्लांट या एरिका पाम, जो प्राकृतिक रूप से हवा को फिल्टर करते हैं।
इसके अलावा, एयर प्यूरिफायर का उपयोग भी फायदेमंद हो सकता है, खासकर उन घरों में जहां बुजुर्ग या बच्चे रहते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि ऐसे समय में कमजोर लोगों को घर से बाहर न निकलने दें, क्योंकि प्रदूषण दिल, फेफड़े और श्वसन तंत्र पर बुरा असर डालता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में हर साल लाखों मौतें वायु प्रदूषण से जुड़ी होती हैं, जो इस समस्या की गहराई को दर्शाता है।
शिक्षा पर असर और सरकारी कदम
प्रदूषण के चलते शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। 13 दिसंबर के एक सरकारी आदेश में दिल्ली के शिक्षा निदेशालय, नगर निगम और अन्य बोर्डों के तहत आने वाले सभी स्कूलों को हाइब्रिड मोड में चलाने को कहा गया है। इसका मतलब है कि जहां संभव हो, ऑनलाइन और ऑफलाइन कक्षाएं साथ-साथ चलेंगी। यह कदम बच्चों की सेहत को ध्यान में रखकर उठाया गया है, क्योंकि छोटे बच्चे प्रदूषण से ज्यादा प्रभावित होते हैं।
पिछले सालों के आंकड़ों से पता चलता है कि दिल्ली का एक्यूआई अक्सर 300 से ऊपर रहता है, जो ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ की श्रेणी में आता है। सरकार जीआरएपी जैसे प्लान से निर्माण कार्यों पर रोक, वाहनों की एंट्री सीमित करने और अन्य उपायों से प्रदूषण नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है, लेकिन लंबे समय के समाधान जैसे हरित ऊर्जा और सार्वजनिक परिवहन में सुधार की जरूरत बनी हुई है।
यह स्थिति हमें सोचने पर मजबूर करती है कि प्रदूषण से लड़ाई में व्यक्तिगत स्तर पर क्या किया जा सकता है। रामदेव की सलाह हो या डॉक्टरों के सुझाव, दोनों ही तरीके अपनाकर हम अपनी सेहत की रक्षा कर सकते हैं। अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं, तो मौसम ऐप्स से एक्यूआई चेक करते रहें और जरूरी सावधानियां बरतें।















