हरिद्वार : उत्तराखंड के हरिद्वार शहर में एक दुखद घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। यहां के जिला अस्पताल की मोर्चरी में एक शव को चूहों ने बुरी तरह नुकसान पहुंचाया, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं।
इस मामले की जांच रिपोर्ट अब जिलाधिकारी के पास पहुंच चुकी है, और उन्होंने अस्पताल के प्रमुख अधिकारियों और ठेकेदार कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है। यह घटना न सिर्फ अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में रखरखाव के मानकों पर भी सवाल उठाती है।
घटना की पृष्ठभूमि और दर्दनाक विवरण
यह पूरी कहानी पंजाबी धर्मशाला के मैनेजर लक्की शर्मा से जुड़ी हुई है, जिनकी उम्र महज 36 साल थी। दिसंबर की शुरुआत में, यानी 5 दिसंबर की रात को, उनकी अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिवार वाले उन्हें तुरंत एम्बुलेंस से जिला अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत के बाद, शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखा गया।
लेकिन अगले दिन जब परिवार वाले शव लेने पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि चूहों ने शव को कई जगहों से काट लिया था, यहां तक कि एक आंख को भी गंभीर नुकसान पहुंचा था। इस दृश्य ने परिवार को सदमे में डाल दिया और उन्होंने अस्पताल में हंगामा कर दिया।
परिवार की प्रतिक्रिया और विरोध प्रदर्शन
परिवार की इस पीड़ा को समझा जा सकता है, क्योंकि मौत पहले से ही एक बड़ा सदमा होता है, और ऊपर से शव की ऐसी दुर्दशा। गुस्साए रिश्तेदारों ने अस्पताल में कुछ तोड़फोड़ भी की, जबकि स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बाहर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने अस्पताल स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की। ऐसे मामलों में परिवार की भावनाओं को संभालना कितना मुश्किल होता है, यह सोचने वाली बात है। भारत में कई अस्पतालों में मोर्चरी की स्थिति अच्छी नहीं है, जहां रखरखाव की कमी से ऐसी घटनाएं कभी-कभी सामने आती हैं, लेकिन हरिद्वार का यह केस खासतौर पर ध्यान खींच रहा है।
जांच की शुरुआत और रिपोर्ट के निष्कर्ष
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने इस शिकायत को बेहद गंभीरता से लिया और तुरंत एक उच्च स्तरीय जांच समिति बनाई। इस समिति की अध्यक्षता अतिरिक्त जिलाधिकारी ने की, और उन्होंने मोर्चरी के हर पहलू की जांच की। रिपोर्ट में साफ तौर पर लापरवाही की पुष्टि हुई है। पता चला कि मोर्चरी के रखरखाव का ठेका जिस कंपनी के पास था, उसके कई डीप फ्रीजर खराब थे। खासकर उस फ्रीजर का ढक्कन टूटा हुआ था, जिसमें शव रखा गया था। इससे चूहों को आसानी से अंदर घुसने का मौका मिल गया। जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और पोस्टमार्टम प्रभारी की तरफ से भी निगरानी में कमी थी।
प्रशासन की कार्रवाई और आगे की संभावनाएं
रिपोर्ट मिलने के बाद, जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, पोस्टमार्टम प्रभारी और ठेकेदार एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उन्हें जल्द जवाब देना होगा, वरना सख्त कार्रवाई हो सकती है, जिसमें मुकदमा दर्ज करना भी शामिल है। ठेकेदार कंपनी पर विशेष नजर है, क्योंकि शुरुआती जांच में ही उनकी जिम्मेदारी में कमी पाई गई थी। हरिद्वार जैसे धार्मिक शहर में, जहां लाखों लोग आते-जाते हैं, अस्पतालों की सुविधाएं मजबूत होना जरूरी है। यह घटना एक सबक है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में छोटी-छोटी लापरवाहियां कितनी बड़ी त्रासदी पैदा कर सकती हैं।
समाज की मांग और सुधार की जरूरत
मृतक के परिवार के अलावा पंजाबी समाज के लोग भी इस मामले में सक्रिय हैं। वे दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। भारत में मोर्चरी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई दिशानिर्देश हैं, जैसे कि फ्रीजर की नियमित जांच और कीट नियंत्रण, लेकिन कई जगहों पर इन्हें नजरअंदाज किया जाता है। उम्मीद है कि इस जांच से हरिद्वार जिला अस्पताल में सुधार आएंगे, और अन्य जगहों पर भी सतर्कता बढ़ेगी।













