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आस्था को राहत: टपकेश्वर महादेव शिवलिंग पर फिर सजा चांदी का नाग

Published on: December 17, 2025 3:12 PM
आस्था को राहत: टपकेश्वर महादेव शिवलिंग पर फिर सजा चांदी का नाग
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देहरादून का प्रसिद्ध टपकेश्वर महादेव मंदिर एक बार फिर अपनी पुरानी शोभा वापस पा चुका है। मंदिर के शिवलिंग पर सदियों से सजाया जाने वाला चांदी का नाग अब फिर से अपनी जगह पर स्थापित हो गया है। यह घटना उन भक्तों के लिए बड़ी राहत की बात है जिनकी आस्था इस प्राचीन धाम से जुड़ी हुई है।

करीब ढाई महीने पहले मंदिर से इस कीमती चांदी के नाग की चोरी हो गई थी। यह नाग लगभग 200 ग्राम का था और शिवलिंग की शोभा बढ़ाता था। चोरी की खबर ने पूरे शहर में हलचल मचा दी थी क्योंकि यह मंदिर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून का प्रमुख आस्था केंद्र है। लाखों श्रद्धालु यहां हर साल दर्शन के लिए आते हैं।

पुलिस ने तेजी से जांच शुरू की और चोर को जल्द ही पकड़ लिया। चोरी का सामान भी बरामद हो गया। हालांकि कानूनी प्रक्रिया की वजह से यह नाग पुलिस के मालखाने में रखा रहा। आखिरकार कोर्ट के आदेश के बाद इसे मंदिर प्रशासन को सौंप दिया गया।

मंदिर की सेवादल समिति के सदस्य अनुभव अग्रवाल ने बताया कि देर शाम पुलिस थाने से नाग लाया गया। फिर पूरे विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ इसे भगवान शिव के शिवलिंग पर दोबारा सजाया गया। इस पल को देखकर मंदिर प्रबंधन और भक्तों के चेहरे पर खुशी झलक रही थी। अब मंदिर फिर से पूरी तरह भक्तों के लिए खुला है और दर्शन करने वालों की संख्या बढ़ने लगी है।

टपकेश्वर मंदिर की अनोखी विशेषता और प्राचीन इतिहास

टपकेश्वर महादेव मंदिर सिर्फ देहरादून ही नहीं बल्कि पूरे उत्तराखंड और देश भर के शिव भक्तों के लिए खास महत्व रखता है। यह मंदिर एक प्राकृतिक गुफा के अंदर बना हुआ है जिसे द्रोण गुफा भी कहते हैं। माना जाता है कि इसकी उम्र हजारों साल पुरानी है और इसका संबंध महाभारत काल से है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत के प्रसिद्ध गुरु द्रोणाचार्य इसी गुफा में तपस्या करते थे। उनके पुत्र अश्वत्थामा के जन्म के बाद जब बच्चे को दूध नहीं मिल रहा था तो भगवान शिव ने प्रसन्न होकर गुफा की छत से दूध की बूंदें टपकानी शुरू कर दीं। उस समय इस शिवलिंग को दूधेश्वर महादेव कहा जाता था।

समय के साथ कलियुग में वह दूध की धारा पानी में बदल गई। आज भी गुफा की चट्टान से पानी की बूंदें लगातार शिवलिंग पर गिरती रहती हैं। यही कारण है कि इस मंदिर का नाम टपकेश्वर पड़ा। यह प्राकृतिक चमत्कार देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। मंदिर टोंस नदी के किनारे बसा है और चारों तरफ हरी-भरी पहाड़ियां इसे और भी सुंदर बनाती हैं।

हर साल महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहां भारी भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालु मानते हैं कि यहां जल चढ़ाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मंदिर के पास सल्फर युक्त गर्म पानी के झरने भी हैं जहां स्नान करने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है।

यह धाम न सिर्फ धार्मिक बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। अगर आप देहरादून घूमने जा रहे हैं तो टपकेश्वर मंदिर जरूर जाएं। यहां की शांति और प्राकृतिक सुंदरता आपको तरोताजा कर देगी।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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