Rudraprayag Wildlife Attacks : उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में इंसान और जंगली जानवरों के बीच टकराव एक पुरानी समस्या है, लेकिन हाल के महीनों में रुद्रप्रयाग जिले में यह स्थिति और गंभीर हो गई है। यहां के गांवों में रहने वाले लोग रोजाना भय के साए में जी रहे हैं, क्योंकि गुलदार और भालू जैसे जानवर बार-बार हमले कर रहे हैं।
यह जिला हिमालय की गोद में बसा है, जहां घने जंगल और विविध वन्यजीवों की मौजूदगी तो है ही, लेकिन बढ़ती आबादी और बदलते पर्यावरण ने इस संतुलन को बिगाड़ दिया है।
हाल की घटनाओं का ब्योरा
पिछले तीन महीनों में रुद्रप्रयाग में गुलदारों ने कम से कम 15 लोगों को घायल किया है, जबकि इस साल अब तक चार लोगों की जान ले ली है। इनमें ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं, जो खेतों या जंगलों के करीब काम करती हैं। इसी तरह, भालू भी सक्रिय हो गए हैं और उन्होंने भी 15 से ज्यादा इंसानों पर हमला किया है। जानवरों पर असर तो और भी ज्यादा है—इन हमलों में 20 से अधिक मवेशी या तो घायल हुए हैं या मारे गए हैं। कभी-कभी भालू झुंड बनाकर गांवों में घुस आते हैं, जिससे ग्रामीणों की नींद उड़ गई है।
उत्तराखंड में यह समस्या पूरे राज्य स्तर पर फैली हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में अब तक भालू के हमलों से 74 लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें पांच की मौत हो चुकी है। पिछले 25 सालों में राज्य भर में 900 से ज्यादा लोग जंगली जानवरों के हमलों का शिकार बने हैं। रुद्रप्रयाग जैसे जिलों में यह संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ रही है, जहां 128 गांवों को संवेदनशील घोषित किया गया है।
क्यों बढ़ रही है यह समस्या
इस टकराव के पीछे कई वजहें हैं। जंगलों में भोजन की कमी एक बड़ा कारण है—भालू और गुलदार जैसे जानवर अब आबादी वाले इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। कचरा खुले में फेंकने से वे आकर्षित होते हैं, जबकि जंगलों में फल-फूल कम हो रहे हैं। जलवायु परिवर्तन ने स्थिति को और बुरा बना दिया है। कम बारिश और हल्की सर्दियां भालुओं को सामान्य से ज्यादा समय तक सक्रिय रखती हैं। आमतौर पर अक्टूबर के बाद वे गांवों से दूर रहते थे, लेकिन अब साल भर उनकी दहशत बनी रहती है।
इसके अलावा, वनों की कटाई और पर्यटन के बढ़ते दबाव ने जानवरों के प्राकृतिक आवास को सिकोड़ दिया है। गुलदार अक्सर आवारा पशुओं को निशाना बनाते हैं, लेकिन कभी-कभी इंसानों से टकराव हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानव गतिविधियां जंगलों को प्रभावित कर रही हैं, जिससे जानवरों को भोजन तलाशने के लिए बाहर आना पड़ता है।
प्रशासन की कोशिशें और समाधान
वन विभाग इस समस्या से निपटने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। अब तक दो आदमखोर गुलदारों और दो भालुओं को पकड़कर सुरक्षित जगहों पर ले जाया गया है। जिले में सर्च ऑपरेशन और निगरानी तेज कर दी गई है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, कई इलाकों में स्कूल जाने के लिए वाहनों की व्यवस्था की गई है। जिला प्रशासन और वन अधिकारियों का मानना है कि समुदाय की भागीदारी से इस समस्या को कम किया जा सकता है।
रजत सुमन जैसे वन अधिकारियों के अनुसार, मौसम में बदलाव इस बढ़ती सक्रियता का मुख्य वजह है। लेकिन लंबे समय के समाधान के लिए जंगलों की रक्षा, कचरा प्रबंधन और जागरूकता अभियान जरूरी हैं। राज्य सरकार भी बड़े स्तर पर योजनाएं बना रही है, ताकि इंसान और जानवर दोनों सुरक्षित रह सकें।
यह स्थिति न सिर्फ रुद्रप्रयाग बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए एक चेतावनी है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह टकराव और बढ़ सकता है। ग्रामीणों की जिंदगी को आसान बनाने के लिए सभी को मिलकर काम करने की जरूरत है।















