हल्द्वानी : किसान सुखवंत सिंह द्वारा खुद को गोली मारने की घटना ने पूरे पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया है। किसान की मौत और उसके द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद ऊधमसिंह नगर के एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने सख्त कदम उठाया है।
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लापरवाही बरतने के आरोप में काशीपुर के आईटीआई थाने के प्रभारी (एसओ) कुंदन रौतेला और एसआई प्रकाश बिष्ट को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा, पैगा पुलिस चौकी इंचार्ज सहित कुल 10 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है।
4 करोड़ की धोखाधड़ी और 30 लाख की रिश्वत का आरोप
यह पूरा मामला जमीन के एक बड़े फर्जीवाड़े से जुड़ा है। किसान सुखवंत सिंह का आरोप था कि उनके साथ चार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई है। भू-माफियाओं के गिरोह ने उन्हें जमीन कोई और दिखाई, लेकिन रजिस्ट्री दूसरी जमीन की कर दी। इस सौदे में तीन करोड़ नकद और एक करोड़ रुपये खाते में लिए गए थे।
सबसे गंभीर आरोप पुलिस की भूमिका पर है। अपनी मौत से पहले किए गए फेसबुक लाइव में सुखवंत ने दावा किया कि गिरोह ने पुलिसवालों को 30 लाख रुपये दिए हैं, जिसके कारण उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी। वह लगातार आईटीआई थाना, पैगा चौकी और उच्चाधिकारियों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन कहीं से भी न्याय नहीं मिला। उल्टे थाने में उनके साथ अभद्रता की गई।
4 मिनट का वीडियो और 27 लोगों के नाम
आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाने से पहले सुखवंत सिंह ने चार मिनट से ज्यादा का फेसबुक लाइव किया। इसमें उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, “मैं एक किसान हूं… मेरे साथ चार करोड़ का फ्रॉड हुआ है। चार महीने तक हमारा उत्पीड़न किया गया।” उन्होंने वीडियो में यह भी कहा कि उनकी पत्नी और बेटे ने हाईकोर्ट में आत्महत्या कर ली है (यह बयान उनके वीडियो का हिस्सा है)।
मौके से मिले सुसाइड नोट और वीडियो में कुल 27 लोगों के नाम सामने आए हैं। इसमें पुलिसकर्मियों के साथ-साथ जमीन हड़पने वाले आरोपियों का भी जिक्र है। परिजनों का साफ कहना है कि अगर पुलिस ने समय रहते शिकायती पत्र पर कार्रवाई की होती, तो आज सुखवंत जिंदा होते।
जांच शुरू, एसपी क्राइम और कमिश्नर को जिम्मा
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी संज्ञान लिया है। सीएम के निर्देश पर कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने प्रकरण की मजिस्ट्रेट जांच शुरू कर दी है।
वहीं, पुलिस स्तर पर एसएसपी ने जांच की जिम्मेदारी एसपी क्राइम निहारिका तोमर को सौंपी है। लाइन हाजिर किए गए सभी पुलिसकर्मियों को तत्काल रुद्रपुर पुलिस लाइन में आमद दर्ज कराने का आदेश दिया गया है।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद मृतक के परिजनों ने अपना प्रस्तावित धरना स्थगित कर दिया है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक सभी दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होती, वे चुप नहीं बैठेंगे। किसान संगठनों ने भी मामले में सीबीआई जांच की मांग तेज कर दी है।



















