आज के तेज़ रफ़्तार वाले जीवन में कई बुजुर्ग अकेले रहते हैं। उनके बच्चे नौकरी या दूसरे कारणों से दूर शहरों में बस जाते हैं। ऐसे में उनकी सेहत, सुरक्षा और रोज़मर्रा की ज़रूरतें चिंता का विषय बन जाती हैं। खासकर साइबर ठगी जैसे नए खतरों ने बुजुर्गों को और कमज़ोर बना दिया है। पूरे देश में साइबर फ्रॉड के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं, और बुजुर्ग अक्सर इनका आसान शिकार बनते हैं क्योंकि वे डिजिटल दुनिया से कम परिचित होते हैं।
पुलिस की सक्रिय भूमिका क्यों ज़रूरी
देहरादून जैसे शहर में बुजुर्गों की संख्या काफी है। यहां की आबादी में वरिष्ठ नागरिकों का एक बड़ा हिस्सा शामिल है, जो अकेलापन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझते हैं। पुलिस का मानना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ समाज के कमज़ोर वर्ग की मदद करना भी उनका फ़र्ज़ है। इसी सोच के साथ देहरादून पुलिस ने बुजुर्गों की सुरक्षा और कुशलता के लिए विशेष कदम उठाए हैं।
घर-घर पहुंच और फोन पर संपर्क
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में पूरे जिले के थानों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि अपने इलाके में रहने वाले हर बुजुर्ग से नियमित संपर्क रखें। पुलिसकर्मी न सिर्फ उनके घर जाकर मिलते हैं, बल्कि फोन पर भी बात करके उनकी सेहत और हालचाल पूछते हैं। अगर किसी को दवा, खाने-पीने या किसी और मदद की ज़रूरत हो, तो तुरंत सहायता का भरोसा दिलाया जाता है।
हाल ही में बसंत विहार थाना क्षेत्र में इस मुहिम को और मजबूत किया गया। 15 दिसंबर 2025 को पुलिस टीम ने कई बुजुर्गों से फोन पर बात की। उनकी सेहत के बारे में जानकारी ली और जरूरत पड़ने पर हर संभव मदद का वादा किया।
साइबर ठगी से बचाव की जागरूकता
इस अभियान में एक खास ध्यान साइबर फ्रॉड पर दिया जा रहा है। बुजुर्गों को बताया जा रहा है कि अंजान कॉल्स, मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें। फेक बैंक कॉल्स, लॉटरी जीतने के झांसे या डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों से ठग कैसे लोगों को लूटते हैं, इसकी साधारण भाषा में समझाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।
पूरे जिले में चल रही मुहिम
यह प्रयास सिर्फ एक थाने तक सीमित नहीं है। एसएसपी के निर्देशन में देहरादून के सभी थाना क्षेत्रों में यह अभियान लगातार चल रहा है। पुलिस उम्मीद करती है कि इससे बुजुर्गों को मानसिक सुकून मिलेगा और वे खुद को अकेला महसूस नहीं करेंगे। समाज में भी यह संदेश जाएगा कि बुजुर्गों की देखभाल सबकी ज़िम्मेदारी है।
ऐसे प्रयासों से न सिर्फ बुजुर्ग सुरक्षित महसूस करते हैं, बल्कि पुलिस और समाज के बीच का रिश्ता भी मजबूत होता है। देहरादून पुलिस की यह पहल वाकई काबिले-तारीफ है।















