Uttarakhand : भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के संसद में दिए गए अभिभाषण को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि यह भाषण महज औपचारिकता नहीं, बल्कि ‘विकसित और आत्मनिर्भर भारत’ की नींव रखने वाला एक ठोस दस्तावेज है।
भट्ट ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य 2047 तक भारत को विश्व महाशक्ति बनाना है और राष्ट्रपति का उद्बोधन इसी मिशन की दिशा तय करता है।
कल्याणकारी सरकार का खाका
महेंद्र भट्ट ने बजट सत्र के आगाज पर राष्ट्रपति के भाषण का विश्लेषण करते हुए कहा कि यह सरकार की जन-कल्याणकारी नीतियों का प्रमाण है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि बीते 11 वर्षों में सरकार ने सेवा और सुशासन के जरिए 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला है।
इतना ही नहीं, सामाजिक सुरक्षा का कवच अब 25 करोड़ से बढ़कर 95 करोड़ नागरिकों तक पहुंच चुका है। भट्ट ने कहा कि सरकार अपने तीसरे कार्यकाल में उन लोगों को और अधिक ताकतवर बनाने पर फोकस कर रही है, जो अभी-अभी गरीबी से बाहर आए हैं, ताकि वे दोबारा उस चक्र में न फंसें।
सुरक्षा और तकनीक पर कड़ा संदेश
सांसद भट्ट ने बताया कि राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और माओवादी उग्रवाद के खिलाफ चल रही निर्णायक कार्रवाई से आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियां काफी कम हुई हैं।
इसके अलावा, भाषण में भविष्य की चुनौतियों का भी जिक्र किया गया। भट्ट ने कहा कि डीप फेक (Deep Fake) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का गलत इस्तेमाल लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है। इस पर मिल-जुलकर काम करने का राष्ट्रपति का आग्रह सरकार की दूरदर्शिता को दिखाता है। साथ ही, पीएम किसान सम्मान निधि और गांवों के विकास के लिए उठाए जा रहे कदमों को प्राथमिकता दी गई है।
‘हंगामे को देश माफ नहीं करेगा’
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने सदन के भीतर विपक्ष के आचरण पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जब सदन में बंकिम चंद्र चटर्जी को श्रद्धांजलि दी जा रही थी और गुरु तेग बहादुर के सर्वोच्च बलिदान का स्मरण किया जा रहा था, तब विपक्षी सांसद हंगामा कर रहे थे।
भट्ट ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा, “विपक्ष का यह कृत्य शर्मनाक है। राष्ट्रपति ने सत्र की शुरुआत में ही सहयोग की अपील की थी, लेकिन विपक्ष ने अपनी असल मंशा जाहिर कर दी है। महापुरुषों के अपमान के लिए देश उन्हें कभी माफ नहीं करेगा।”



















