उत्तराखंड की राजनीति इन दिनों काफी गर्म है, जहां भाजपा नेता अजय भट्ट ने कांग्रेस की हालिया दिल्ली रैली पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस रैली को पूरी तरह से विफल बताते हुए कहा कि इसमें शामिल होने वाले लोगों की संख्या और उठाए गए मुद्दे दोनों ही निराशाजनक थे। भट्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने इस रैली को जिस उद्देश्य से आयोजित किया था, वह तो सालों पहले ही पूरा हो चुका है।
उन्होंने याद दिलाया कि 2014 के लोकसभा चुनावों में देश की जनता ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया था, और उसके बाद 2017 में उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में भी राज्य की जनता ने कांग्रेस को करारी शिकस्त दी। यह सब उस समय की बात है जब कांग्रेस पर वोटों की अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, जिसने उनकी छवि को काफी नुकसान पहुंचाया।
पीएम मोदी पर व्यक्तिगत हमले
रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कुछ टिप्पणियां की गईं, जिनमें उनकी मौत की कामना जैसी बातें शामिल थीं। भट्ट ने इसे अस्वीकार्य बताते हुए कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान न केवल अपमानजनक हैं, बल्कि देश के लोकप्रिय नेता के खिलाफ हैं, जो वैश्विक स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, मोदी की लोकप्रियता सर्वेक्षणों में हमेशा ऊंची रही है, जैसे कि 2023 के प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे में उन्हें दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेताओं में शुमार किया गया था। भट्ट ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी के भाषणों से प्रेरित होकर, ऐसे हमले हो रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने पिछले सालों में 150 से ज्यादा बार मोदी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया है, और कई मामलों में कानूनी कार्रवाई भी चल रही है।
देवभूमि की जनता का गुस्सा
उत्तराखंड, जिसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है, की जनता राष्ट्रवादी सोच वाली है और ऐसे हमलों को बर्दाश्त नहीं करेगी, ऐसा भट्ट का मानना है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कांग्रेस ने जल्दी माफी नहीं मांगी, तो 2027 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। राज्य में भाजपा की मजबूत पकड़ को देखते हुए, जहां 2022 के चुनावों में उन्होंने 47 सीटें जीतीं जबकि कांग्रेस को सिर्फ 19 मिलीं, यह दावा काफी मजबूत लगता है।
भट्ट ने रैली की कमजोरी पर भी प्रकाश डाला, जहां कांग्रेस ने अपने संगठन से ज्यादा लोगों को जुटाने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाई। उन्होंने इसे कांग्रेस के आंतरिक असंतोष का संकेत बताया, जहां राज्य स्तर के नेता दिल्ली में ज्यादा समय बिताते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर कमजोर हैं।
कांग्रेस की चुनौतियां
कांग्रेस की यह रैली मूल रूप से सत्ता में वापसी के लिए थी, लेकिन भट्ट के अनुसार, यह उनके युवा नेतृत्व के लिए एक तरह का विदाई समारोह बन गई। पार्टी को अब संगठनात्मक मजबूती पर ध्यान देना होगा, क्योंकि उत्तराखंड जैसे राज्यों में स्थानीय मुद्दे जैसे पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
भट्ट ने कहा कि जनता अब पहले से ज्यादा जागरूक है और पुराने मुद्दों पर आधारित रैलियां काम नहीं करेंगी। कुल मिलाकर, यह घटना उत्तराखंड की राजनीति में नई बहस छेड़ सकती है, जहां दोनों पार्टियां 2027 के लिए अपनी रणनीतियां तैयार कर रही हैं।













