Uttarakhand Budget 2026-27: उत्तराखंड सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट की तैयारी शुरू कर दी है. इस बीच, प्रदेश की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने बजट में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है.
Dehradun : कबाड़ी बनकर रेकी करने वाले दो चोर गिरफ्तार, 9 लाख का माल बरामद
उन्होंने मुख्य सचिव आनंद बर्धन को पत्र भेजकर सुझाव दिया है कि आगामी बजट में कुल राशि का 30 फीसदी हिस्सा महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए.
हर विभाग की योजनाओं में महिलाओं को प्राथमिकता
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि केवल महिला बाल विकास विभाग ही नहीं, बल्कि सरकार के हर विभाग को अपनी योजनाओं में ‘जेंडर बजटिंग’ को शामिल करना होगा. चाहे वह निर्माण विभाग हो या शिक्षा, हर क्षेत्र की योजनाओं का सीधा या अप्रत्यक्ष असर महिलाओं और बालिकाओं के जीवन पर पड़ता है.
मंत्री ने सुझाव दिया है कि संसाधनों के आवंटन, नीतियों के निर्माण और व्यय की निगरानी करते समय जेंडर संवेदनशीलता का खास ख्याल रखा जाए. इसके लिए सभी विभागों को अपने बजट का कम से कम 30 फीसदी हिस्सा ऐसी योजनाओं पर खर्च करना चाहिए जो सीधे तौर पर लैंगिक समानता को बढ़ावा देती हों.
लगातार बढ़ रही है जेंडर बजटिंग की हिस्सेदारी
पिछले पांच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि उत्तराखंड सरकार ने जेंडर बजटिंग पर अपना फोकस बढ़ाया है. वर्ष 2021-22 में यह हिस्सा कुल बजट का करीब 12 फीसदी था. इसके बाद 2022-23 में यह बढ़कर 13.77 फीसदी और 2023-24 में लगभग 14 फीसदी हो गया.
वित्तीय वर्ष 2024-25 में जेंडर बजट का आवंटन 16 फीसदी तक पहुंचा. वहीं, वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य के कुल 1,01,175 करोड़ रुपये के बजट में जेंडर बजट की हिस्सेदारी लगभग 17 फीसदी दर्ज की गई है. अब सरकार का लक्ष्य इस आंकड़े को और ऊपर ले जाने का है.
सशक्तिकरण के लिए धन का प्रवाह जरूरी
रेखा आर्या ने जोर देकर कहा कि प्रदेश में जेंडर बजटिंग की व्यवस्था पिछले दो दशकों से लागू है, लेकिन शुरुआती सालों में इसके तहत बहुत कम राशि मिलती थी. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने पिछले पांच सालों में इसमें लगातार बढ़ोतरी की है.
मंत्री के अनुसार, महिलाओं को सही मायने में सशक्त बनाने और उन्हें आर्थिक व सामाजिक रूप से मजबूत करने के लिए अब ज्यादा बजट की दरकार है. इसी उद्देश्य से उन्होंने आगामी सत्र में महिला केंद्रित योजनाओं के लिए 30 फीसदी आरक्षण की वकालत की है और यह सुनिश्चित करने को कहा है कि हर विभाग इस नीति का सख्ती से पालन करे.



















