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Uttarakhand : इस साल किसी से मत लेना नए साल की बधाई, वरना अकाउंट हो जायेगा खाली

Published on: December 17, 2025 4:25 PM
Uttarakhand : इस साल किसी से मत लेना नए साल की बधाई, वरना अकाउंट हो जायेगा खाली
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जैसे-जैसे दिसंबर का महीना आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे लोग नए साल की तैयारी में जुट गए हैं। दोस्तों और परिवार वालों को बधाई देने का दौर शुरू हो चुका है, और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मैसेज, इमेज और वीडियो की बाढ़ आ गई है।

लेकिन इसी उत्साह के बीच एक छिपा खतरा भी मंडरा रहा है, जहां साइबर अपराधी त्योहार की आड़ में लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। भारत में पिछले कुछ सालों में ऑनलाइन ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं, और नए साल जैसे मौकों पर ये और भी सक्रिय हो जाते हैं।

साइबर ठगी का बढ़ता साया और आंकड़े जो चौंकाते हैं

आज की डिजिटल दुनिया में लगभग हर काम ऑनलाइन हो रहा है – शॉपिंग से लेकर बैंकिंग तक। इसी का फायदा उठाकर साइबर ठग नए-नए तरीकों से लोगों को फंसाते हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2022 में जहां साइबर अपराध के 10.29 लाख मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 22.68 लाख हो गई। 2024 में ही साइबर फ्रॉड से 22,845 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जो पिछले साल से 206% ज्यादा है।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2025 में यह नुकसान 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, और फाइनेंशियल फ्रॉड इनमें से 75% हिस्सा रखते हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि कैसे ठग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करके लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं।

त्योहारों में बधाई के नाम पर जाल बिछाना

नए साल के आने में अब बस कुछ ही दिन बाकी हैं, और लोग व्हाट्सऐप, फेसबुक या इंस्टाग्राम जैसे ऐप्स पर एक-दूसरे को शुभकामनाएं भेज रहे हैं। लेकिन साइबर ठग इसी मौके का इंतजार करते हैं। वे अजनबी नंबरों से आकर्षक बधाई मैसेज भेजते हैं, जिनमें लिंक या एपीके फाइल्स छिपी होती हैं। ये फाइल्स असल में मैलवेयर होती हैं, जो क्लिक करते ही आपके फोन में घुस जाती हैं।

नतीजा? आपका डिवाइस हैक हो जाता है, पर्सनल डेटा चोरी हो जाता है, और बैंक अकाउंट से पैसे गायब। उदाहरण के लिए, ठग फर्जी आईडी बनाकर दोस्ती का प्रस्ताव देते हैं या केवाईसी अपडेट का बहाना बनाकर लिंक शेयर करते हैं। ऐसे में, एक छोटी सी गलती पूरी जिंदगी की बचत को जोखिम में डाल सकती है।

पुलिस की जागरूकता मुहिम और चुनौतियां

इन बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस विभाग सक्रिय हो गया है। जिला पुलिस और साइबर सेल टीमें लोगों को पहले से ही सतर्क कर रही हैं। वे वर्कशॉप आयोजित कर रही हैं, जहां ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में बताया जाता है। उदाहरण के लिए, ऊधम सिंह नगर के एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने बताया कि ठग हर दिन नए तरीके अपनाते हैं, लेकिन जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।

पुलिस की कोशिश है कि लोग इन ट्रिक्स को समझें और समय रहते रिपोर्ट करें। हालांकि, चुनौती यह है कि ठग लगातार अपनी रणनीति बदलते रहते हैं, जिससे रोकथाम मुश्किल हो जाती है।

खुद को कैसे रखें सुरक्षित

सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सावधानी बरतना जरूरी है। अगर कोई अजनबी नंबर से बधाई का लिंक या फाइल भेजे, तो उसे कभी न खोलें। ऐसे मैसेज को इग्नोर करें और ब्लॉक कर दें। अगर कुछ संदेह हो, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर थाने में जाकर शिकायत दर्ज कराएं। वित्तीय ठगी के मामले में 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करके मदद लें।

याद रखें, असली बधाई दिल से आती है, न कि संदिग्ध लिंक्स से। इस तरह की छोटी-छोटी आदतें अपनाकर आप नए साल को सुरक्षित और खुशहाल बना सकते हैं।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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